Jallianwala Bagh massacre की 107वीं बरसी, PM Modi और राष्ट्रपति Murmu ने दी श्रद्धांजलि, शहीदों को किया याद
भारत के इतिहास का एक बहुत ही दुखद दिन आज फिर याद किया गया. 13 अप्रैल 2026 को Jallianwala Bagh massacre की 107वीं बरसी मनाई गई. इस मौके पर राष्ट्रपति Droupadi Murmu और प्रधानमंत्री Narendra Modi समेत कई बड़े नेताओं ने शहीदों को याद किया और उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि दी.
बड़े नेताओं ने शहीदों को कैसे याद किया?
इस दुखद घटना की बरसी पर देश के शीर्ष नेताओं ने अपनी भावनाएं व्यक्त कीं. उन्होंने बताया कि यह बलिदान आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करता रहेगा.
| नेता का नाम | मुख्य बात |
|---|---|
| President Droupadi Murmu | अमर स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि दी और कहा कि देश उनका हमेशा आभारी रहेगा. |
| PM Narendra Modi | शहीदों के बलिदान को भारतीय लोगों की अटूट भावना का प्रतीक बताया. |
| Rajnath Singh | इस घटना को भारत की आजादी की लड़ाई का एक निर्णायक मोड़ बताया. |
| Amit Shah | कहा कि इस massacre ने ब्रिटिश शासन के क्रूर और अमानवीय चेहरे को सबके सामने ला दिया. |
| Himanta Biswa Sarma | कहा कि यह दर्दनाक अध्याय आजादी के संकल्प को और मजबूत करने वाला था. |
शहीदों की लिस्ट को लेकर क्या विवाद है?
12 अप्रैल 2026 को शहीदों की एक प्रमाणित और सरकारी लिस्ट को सार्वजनिक करने की मांग फिर से उठी है. पूर्व सांसद और ट्रस्टी Tarlochan Singh ने पंजाब के मुख्यमंत्री Bhagwant Mann को चिट्ठी लिखकर इस लिस्ट को जारी करने का आग्रह किया है.
इतिहासकारों के बीच मरने वालों की सही संख्या को लेकर अब भी बहस है. ब्रिटिश रिकॉर्ड के मुताबिक 379 लोग मारे गए थे, जबकि Indian National Congress के अनुमान के अनुसार यह संख्या 1,000 से भी ज्यादा थी. Shaheed Parivar Samiti के अध्यक्ष Mahesh Behal ने कहा कि अभी तक ऐसी कोई लिस्ट नहीं है जिसे हर कोई माने, इसलिए कई परिवार अपने पूर्वजों के नाम इसमें जुड़वाना चाहते हैं.
मेमोरियल ट्रस्ट की स्थिति क्या है?
Jallianwala Bagh National Memorial Trust के कामकाज को लेकर भी कुछ बातें सामने आई हैं. ट्रस्ट के पदाधिकारियों का कार्यकाल साल 2023 में ही खत्म हो चुका था, लेकिन अब तक नए पदाधिकारियों की नियुक्ति नहीं की गई है.
यह स्मारक आज भी साहस और प्रतिरोध के प्रतीक के रूप में खड़ा है. लोग यहाँ आकर उन मासूमों को याद करते हैं जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपनी जान गंवाई थी.




