अमेरिका का बड़ा फैसला, ईरान के बंदरगाहों पर लगेगी नाकेबंदी, बढ़ सकते हैं तेल के दाम
अमेरिका ने ईरान के खिलाफ एक बहुत बड़ा कदम उठाया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के बंदरगाहों की नाकेबंदी करने का ऐलान किया है। इस खबर के बाद दुनिया भर के तेल बाजार में खलबली मच गई है और कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ गई हैं। आम लोगों की जेब पर इसका सीधा असर पेट्रोल और डीजल की कीमतों के रूप में दिख सकता है।
अमेरिका ने क्या फैसला लिया और यह कब से लागू होगा?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 13 अप्रैल 2026 को होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरानी बंदरगाहों के लिए नाकेबंदी की घोषणा की। यह फैसला सोमवार शाम 7:30 बजे (भारतीय समय) से लागू होगा। यह कदम इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हुई शांति वार्ता के फेल होने के बाद उठाया गया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने साफ किया है कि यह पाबंदी सिर्फ ईरानी बंदरगाहों पर जाने वाले जहाजों के लिए है, बाकी जहाजों को आने-जाने की अनुमति होगी।
तेल की कीमतों और दुनिया पर क्या असर होगा?
नाकेबंदी की खबर आते ही वैश्विक बाजार में कच्चे तेल के दाम बढ़ गए हैं। इससे सप्लाई चेन पर दबाव पड़ेगा और आने वाले समय में तेल महंगा हो सकता है।
| तेल का प्रकार | कीमत में उछाल |
|---|---|
| अमेरिकी क्रूड | 8% बढ़त |
| ब्रेंट क्रूड | 7% बढ़त |
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है, इसलिए इस स्थिति पर भारतीय विदेश मंत्रालय की नजर है। भारत ने उम्मीद जताई है कि व्यापार में कोई रुकावट नहीं आएगी। हालांकि, अमेरिका के ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने बाजार को स्थिर रखने के लिए समुद्र में फंसे करीब 140 मिलियन बैरल ईरानी तेल की बिक्री की अनुमति देने की बात कही है।
ईरान और चीन का इस नाकेबंदी पर क्या कहना है?
ईरान के अधिकारियों का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य उनके नियंत्रण में है और वहां से गुजरने वाले जहाजों को रियाल में टोल टैक्स देना होगा। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने इसे एक नियंत्रित गलियारा बना दिया है, जहां जहाजों को क्लीयरेंस कोड और भुगतान करना होगा। ईरान ने यह भी कहा कि लेबनान में हमले जारी रहने तक वह प्रतिदिन केवल 15 जहाजों को ही गुजरने की अनुमति देगा। वहीं चीन ने कहा है कि उसके और ईरान के बीच व्यापारिक समझौते हैं और चीनी जहाजों के लिए रास्ता खुला रहेगा।




