Strait of Hormuz: फ्रांस और ब्रिटेन का बड़ा फैसला, जहाजों के सुरक्षित रास्ते के लिए चलाएंगे मिशन, जल्द बुलाएंगे मीटिंग
फ्रांस और ब्रिटेन ने मिलकर एक बड़ा फैसला लिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जहाजों के आने-जाने के रास्ते को सुरक्षित बनाने के लिए दोनों देश एक अंतरराष्ट्रीय मिशन की अगुवाई करेंगे। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सोमवार को इसकी जानकारी दी। इस कदम का मकसद इलाके में तनाव कम करना और समुद्री व्यापार को फिर से सुचारू बनाना है।
फ्रांस और ब्रिटेन के इस मिशन का असली मकसद क्या है?
राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने बताया कि यह मिशन पूरी तरह से सुरक्षा के लिए होगा। आने वाले दिनों में फ्रांस और ब्रिटेन उन देशों के साथ एक कॉन्फ्रेंस करेंगे जो इस मिशन में मदद करना चाहते हैं। मैक्रों ने साफ किया कि यह मिशन strictly defensive होगा और इसका किसी भी देश के साथ चल रहे युद्ध से कोई लेना-देना नहीं होगा। फ्रांस ने पहले ही कह दिया था कि वह बल प्रयोग के खिलाफ है और स्थिति शांत होने पर जहाजों को एस्कॉर्ट करने की जिम्मेदारी लेगा।
ब्रिटेन का अमेरिका के ब्लॉकड प्लान पर क्या कहना है?
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने 13 अप्रैल 2026 को साफ तौर पर कहा कि वे ईरानी बंदरगाहों की अमेरिकी नाकाबंदी का समर्थन नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन का मुख्य उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलना है ताकि वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की कीमतें कम हो सकें। स्टार्मर ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि ब्रिटेन इस समय किसी भी तरह के युद्ध में नहीं फंसना चाहता है।
ईरान का क्या कहना है और कौन-कौन से देश इसमें शामिल हैं?
ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने दावा किया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर उनका पूरा नियंत्रण है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर कोई सैन्य जहाज करीब आएगा तो उसका कड़ा जवाब दिया जाएगा। हालांकि, ईरान ने यह भी कहा है कि गैर-सैन्य जहाजों के लिए रास्ता खुला है, लेकिन इसके लिए उन्हें ईरान से सलाह लेनी होगी। इस मिशन की योजना बनाने में अब तक लगभग 15 देश शामिल बताए जा रहे हैं।




