US-Iran ceasefire खतरे में, इस्लामाबाद में बातचीत रही नाकाम, अब दोबारा मीटिंग कराने की कोशिश
अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता बिना किसी समझौते के खत्म हो गई है। इस्लामाबाद में हुई इस मीटिंग के बाद अब 22 अप्रैल को खत्म होने वाले ceasefire पर संकट मंडरा रहा है। पाकिस्तान, मिस्र और तुर्की जैसे देश अब जल्द से जल्द दूसरी मीटिंग कराने की कोशिश में जुटे हैं ताकि युद्ध जैसी स्थिति न बने।
बातचीत क्यों नहीं बन पाई और क्या हैं मुख्य विवाद?
दोनों देशों के बीच कई मुद्दों पर सहमति नहीं बन पाई। अमेरिका चाहता है कि ईरान परमाणु हथियार न बनाने का पक्का वादा करे, जबकि ईरान अपनी शर्तों पर अड़ा हुआ है। मुख्य विवादों की जानकारी नीचे टेबल में दी गई है:
| मुख्य मुद्दा | विवाद का कारण |
|---|---|
| Strait of Hormuz | बिना फीस के रास्ता खोलने और इसके नियंत्रण पर विवाद |
| परमाणु कार्यक्रम | यूरेनियम के स्टॉक और परमाणु हथियार न बनाने की प्रतिबद्धता |
| जमा पैसा | ईरान द्वारा अपने 27 अरब डॉलर के फ्रीज फंड्स की मांग |
| प्रतिबंध | सभी प्राथमिक और माध्यमिक प्रतिबंधों को हटाने की मांग |
अमेरिका और ईरान के बड़े नेताओं ने क्या कहा?
अमेरिकी उपराष्ट्रपति J.D. Vance ने बताया कि ईरान ने परमाणु कार्यक्रम को छोड़ने से इनकार कर दिया है और अमेरिका की शर्तों को नहीं माना। वहीं ईरान के संसद स्पीकर Mohammad Bagher Ghalibaf ने कहा कि उन्होंने अच्छे प्रस्ताव दिए लेकिन अमेरिका भरोसा जीतने में नाकाम रहा। इसी बीच अमेरिकी सेना ने यह भी ऐलान किया कि वह जल्द ही ईरानी बंदरगाहों से जहाजों का रास्ता ब्लॉक कर देगी।
Kuwait और Pakistan की इस पर क्या प्रतिक्रिया है?
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और अन्य बड़े अधिकारी बातचीत को दोबारा शुरू कराने के लिए वॉशिंगटन और तेहरान से संपर्क कर रहे हैं। Kuwait ने ceasefire का स्वागत किया है लेकिन ईरान और उसके सहयोगी समूहों से सभी हमले रोकने की अपील की है। Kuwait ने इस बात पर जोर दिया है कि Strait of Hormuz में जहाजों की आवाजाही पूरी तरह सुरक्षित रहनी चाहिए।




