Iran-Saudi Update: अमेरिका-ईरान वार्ता रही नाकाम, अब सऊदी और ईरान के बीच हाई-लेवल बातचीत शुरू
ईरान और सऊदी अरब के बीच एक बार फिर हाई-लेवल बातचीत हुई है। यह संपर्क तब हुआ जब पाकिस्तान में अमेरिका और ईरान के बीच हुई लंबी वार्ता किसी समझौते तक नहीं पहुँच सकी। दोनों देशों के विदेश मंत्रियों ने फोन पर क्षेत्रीय तनाव और आगे की स्थितियों पर चर्चा की ताकि इलाके में शांति बनी रहे।
अमेरिका और ईरान की बातचीत क्यों नाकाम हुई?
पाकिस्तान के इस्लामाबाद में 11 और 12 अप्रैल, 2026 को अमेरिका और ईरान के बीच 21 घंटे तक सीधी बातचीत चली। इस वार्ता में ईरान के परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति पर सहमति नहीं बन पाई। अमेरिका ने शर्त रखी थी कि ईरान परमाणु हथियार विकसित न करे, लेकिन ईरान ने इसे अस्वीकार कर दिया। इसी वजह से यह लंबी वार्ता बिना किसी नतीजे के समाप्त हो गई।
वार्ता विफल होने के बाद क्या बड़े कदम उठाए गए?
इस्लामाबाद वार्ता नाकाम होने के तुरंत बाद, 13 अप्रैल, 2026 को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर नौसैनिक नाकाबंदी लगाने की घोषणा की। इससे पहले 9 अप्रैल को दोनों देशों के बीच छह सप्ताह की लड़ाई को खत्म करने के लिए दो सप्ताह का युद्धविराम शुरू हुआ था। पाकिस्तान ने इस पूरी प्रक्रिया में मध्यस्थ की भूमिका निभाई और दोनों पक्षों से युद्धविराम बनाए रखने की अपील की थी।
क्षेत्रीय घटनाक्रम और अन्य देशों की स्थिति
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच सऊदी अरब और पाकिस्तान की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। इस पूरे घटनाक्रम से जुड़ी मुख्य बातें नीचे टेबल में दी गई हैं:
| मुख्य बिंदु | विवरण |
|---|---|
| ईरान-सऊदी बातचीत | 13 अप्रैल को विदेश मंत्री अब्बास अराक्ची और फैसल बिन फरहान के बीच फोन पर चर्चा हुई। |
| पाकिस्तान का दौरा | प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ अगले 48 घंटों में सऊदी अरब जा सकते हैं। |
| सैन्य तैनाती | पाकिस्तान ने रक्षा समझौते के तहत सऊदी अरब में सैन्यकर्मी तैनात किए हैं। |
| राजनयिक संबंध | चीन की मदद से मार्च 2023 में ईरान और सऊदी ने संबंध फिर से शुरू किए थे। |
| पहला आधिकारिक संपर्क | संघर्ष शुरू होने के बाद 9 अप्रैल को दोनों विदेश मंत्रियों ने पहली बार बात की थी। |
| वार्ता का उद्देश्य | क्षेत्रीय तनाव कम करना और सुरक्षा व्यवस्था को दोबारा बहाल करना। |




