US Navy ने ईरान के बंदरगाहों की की घेराबंदी, राष्ट्रपति ट्रंप का सख्त आदेश, Strait of Hormuz में युद्धपोत तैनात
अमेरिका की नेवी ने ईरान के बंदरगाहों और तटीय इलाकों की घेराबंदी शुरू कर दी है। यह बड़ा एक्शन 13 अप्रैल 2026 की सुबह 10:00 बजे से लागू हुआ। पाकिस्तान में अमेरिका और ईरान के बीच हुई शांति वार्ता के नाकाम होने के बाद यह कदम उठाया गया है। इस वजह से पूरे मिडिल ईस्ट इलाके में तनाव काफी बढ़ गया है।
अमेरिका ने घेराबंदी क्यों की और इसके क्या नियम हैं?
राष्ट्रपति Donald Trump ने आदेश दिया कि Strait of Hormuz में आने या जाने वाले सभी जहाजों की घेराबंदी की जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि जो भी ईरानी जहाज इस काम में बाधा डालेंगे, उन्हें तुरंत खत्म कर दिया जाएगा। US Central Command (CENTCOM) ने साफ किया है कि यह नियम सभी देशों के उन जहाजों पर लागू होगा जो ईरानी बंदरगाहों का इस्तेमाल कर रहे हैं। हालांकि, जो जहाज ईरान के बंदरगाहों पर नहीं जा रहे, उनके आने-जाने के रास्ते में कोई रुकावट नहीं आएगी।
घेराबंदी में कौन-कौन से अमेरिकी युद्धपोत शामिल हैं?
इस पूरे ऑपरेशन को चलाने के लिए अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में कम से कम 15 युद्धपोतों को तैनात किया है। इनमें विमानवाहक पोत और कई डिस्ट्रॉयर्स शामिल हैं, जो अलग-अलग जगहों पर तैनात किए गए हैं।
| श्रेणी | जहाजों के नाम |
|---|---|
| विमानवाहक पोत (Aircraft Carrier) | USS Abraham Lincoln |
| डिस्ट्रॉयर्स (Destroyers) | USS Bainbridge, USS Thomas Hudner, USS Frank E. Petersen Jr., USS Delbert D. Black, USS John Finn, USS Michael Murphy, USS Mitscher, USS Pinckney, USS Rafael Peralta, USS Spruance, USS Milius |
| Amphibious Ready Group | USS Tripoli, USS New Orleans, USS Rushmore |
| माइन-हंटर्स (Mine-hunters) | USS Chief, USS Pioneer |
ईरान और अन्य देशों की इस पर क्या प्रतिक्रिया है?
ईरान ने इस घेराबंदी को पूरी तरह गैरकानूनी और समुद्री डकैती जैसा बताया है। ईरानी अधिकारियों ने धमकी दी है कि वे इसका जोरदार जवाब देंगे और कहा कि इस क्षेत्र का कोई भी बंदरगाह अब सुरक्षित नहीं रहेगा। दूसरी ओर, NATO देशों ने इस घेराबंदी में अमेरिका का साथ देने से मना कर दिया है। UN के महासचिव Antonio Guterres ने दोनों देशों से फिर से बातचीत शुरू करने की अपील की है। इस तनाव का बड़ा असर चीन पर भी पड़ सकता है क्योंकि वह ईरान से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है।




