West Asia Conflict: विदेश मंत्री S. Jaishankar ने ऑस्ट्रेलिया और इसराइल से की बात, भारत के 25 लाख लोगों पर पड़ सकता है असर
भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar ने मंगलवार को ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री Penny Wong और इसराइल के विदेश मंत्री Gideon Sa’ar से फोन पर बातचीत की। इस चर्चा का मुख्य केंद्र पश्चिम एशिया (West Asia) में बढ़ता तनाव और वहां की सुरक्षा स्थिति रही। भारत इस समय वैश्विक स्तर पर शांति बनाए रखने के लिए अपने महत्वपूर्ण साझेदारों के साथ तालमेल बिठा रहा है।
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किन मुद्दों पर हुई चर्चा और क्या रही बातचीत?
S. Jaishankar ने ऑस्ट्रेलिया की मंत्री Penny Wong के साथ पश्चिम एशिया के संघर्ष और इंडो-पैसिफिक (Indo-Pacific) क्षेत्र के मुद्दों पर चर्चा की। वहीं, इसराइल के मंत्री Gideon Sa’ar के साथ उनकी बातचीत में ईरान, लेबनान और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की स्थिति पर बात हुई। इसराइल ने ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने के लिए अमेरिका के कड़े रुख को जरूरी बताया और कहा कि ईरान की हरकतों से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ रहा है।
आम भारतीयों और अर्थव्यवस्था पर क्या होगा असर?
संयुक्त राष्ट्र (UN) की एक रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम एशिया के इस युद्ध की वजह से भारत के करीब 25 लाख लोग गरीबी की चपेट में आ सकते हैं। भारत अपनी जरूरत का तेल, एलपीजी और खाद के लिए इस क्षेत्र पर काफी निर्भर है। युद्ध के कारण ईंधन और माल ढुलाई के दाम बढ़ सकते हैं, जिससे आम आदमी की खरीदारी की क्षमता कम होगी और छोटे उद्योगों (MSME) में नौकरियों का खतरा बढ़ सकता है।
भारत का इस पूरे विवाद पर क्या रुख है?
भारत ने इस संघर्ष को रोकने के लिए युद्धविराम का स्वागत किया है और सभी पक्षों से बातचीत और कूटनीति के जरिए समाधान निकालने की अपील की है। भारत चाहता है कि होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए होने वाला अंतरराष्ट्रीय व्यापार और जहाजों की आवाजाही बिना किसी रुकावट के चलती रहे। देश इस समय रूस, ईरान, फ्रांस और ओमान जैसे देशों के साथ भी संपर्क में है ताकि स्थिति को बिगड़ने से रोका जा सके।




