Qatar Denial: ईरान को चुप कराने के लिए कतर ने नहीं दिए पैसे, विदेश मंत्रालय ने दावों को बताया पूरी तरह गलत
कतर सरकार ने उन खबरों का पूरी तरह खंडन किया है जिनमें कहा गया था कि उन्होंने ईरान पर हो रहे हमलों को रोकने के लिए पैसे दिए हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजिद अल-अंसारी ने साफ किया कि ऐसी बातें बिल्कुल बेबुनियाद हैं और इनमें कोई सच्चाई नहीं है। यह मामला अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है क्योंकि कतर अपनी संप्रभुता को लेकर काफी सख्त है।
🗞️: Italy का बड़ा फैसला, Israel के साथ रक्षा समझौता किया निलंबित, सैन्य ट्रेनिंग अब नहीं होगी।
पैसे देने के दावों और 6 बिलियन डॉलर का क्या सच है?
प्रवक्ता माजिद अल-अंसारी ने उन रिपोर्ट्स पर बात की जिनमें हमलों में कमी को 6 बिलियन डॉलर से जोड़ा गया था। उन्होंने बताया कि यह बात पूरी तरह भ्रामक है। यह पैसा किसी सुरक्षा सौदे का हिस्सा नहीं है, बल्कि यूरोपीय बैंकों की देखरेख में चलने वाला एक अंतरराष्ट्रीय मानवीय तंत्र है। इस व्यवस्था को अमेरिका की सहमति से बनाया गया था और इसका मकसद सिर्फ मानवीय मदद पहुँचाना था।
ईरान के हमलों और कतर के स्टैंड पर मुख्य बातें
- हमलों का असर: ईरान ने केवल सैन्य ठिकानों पर ही नहीं, बल्कि नागरिक और औद्योगिक जगहों को भी निशाना बनाया।
- एयरपोर्ट पर खतरा: हवाई अड्डे को निशाना बनाने की कोशिश हुई, जिसकी वजह से कतर के हवाई क्षेत्र को कुछ समय के लिए बंद करना पड़ा।
- मुआवजे की मांग: कतर ने ईरान से मांग की है कि इन हमलों की वजह से हुए नुकसान की भरपाई की जाए।
- क्षेत्रीय सुरक्षा: कतर का मानना है कि किसी भी एक खाड़ी देश पर हमला, सभी पर हमला माना जाएगा।
- कूटनीतिक तालमेल: कतर इस मामले में अमेरिका, पाकिस्तान और अन्य क्षेत्रीय देशों के साथ मिलकर काम कर रहा है।
- हक की बात: कतर ने कहा कि वह अपनी सुरक्षा के लिए संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 के तहत जवाब देने का हक रखता है।




