Israel-Lebanon Meeting: वॉशिंगटन में मिले इसराइल और लेबनान के राजदूत, हिजबुल्लाह को खत्म करने पर बनी सहमति
वॉशिंगटन डीसी में एक ऐतिहासिक मुलाकात हुई जहां इसराइल और लेबनान के राजदूतों ने आमने-सामने बैठकर बात की। दशकों बाद दोनों देशों के बीच यह पहली सीधी डिप्लोमैटिक बातचीत थी। इस मीटिंग का मुख्य मकसद हिजबुल्लाह को रोकना और इलाके में शांति लाना था। अमेरिका ने इस पूरी प्रक्रिया में मध्यस्थ की भूमिका निभाई।
मीटिंग में क्या बातें हुईं और क्या मुख्य लक्ष्य रहे?
इसराइल के राजदूत Yechiel Leiter और लेबनान की राजदूत Nada Hamadeh Moawad ने इस मीटिंग में हिस्सा लिया। Leiter ने बातचीत के बाद कहा कि उन्हें यह अहसास हुआ कि दोनों देश अब एक ही दिशा में सोच रहे हैं। इसराइल का मुख्य लक्ष्य हिजबुल्लाह को पूरी तरह खत्म करना और लेबनान को ईरान के प्रभाव से मुक्त कराना है। इसराइल ने साफ कर दिया कि जब तक हिजबुल्लाह के हमले जारी रहेंगे, वह ceasefire पर कोई बात नहीं करेगा।
अमेरिका की क्या भूमिका रही और अन्य अधिकारियों का क्या कहना है?
अमेरिका ने इस बातचीत को संभव बनाया और कई बड़े अधिकारी इसमें शामिल हुए। मीटिंग में अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio, राजदूत Michel Issa और Mike Waltz जैसे लोग मौजूद थे। Rubio ने इस मुलाकात को एक ऐतिहासिक मौका बताया। उन्होंने यह भी कहा कि दशकों पुरानी दुश्मनी और जटिलताओं के कारण तुरंत कोई बड़ा बदलाव आना मुश्किल है। लेबनान की सरकार ने हिजबुल्लाह के कड़े विरोध के बावजूद इस बातचीत को आगे बढ़ाया।
हिजबुल्लाह और ईरान का इस मुलाकात पर क्या रिएक्शन था?
हिजबुल्लाह ने इस सीधी बातचीत का पूरी तरह विरोध किया। हिजबुल्लाह के प्रमुख Naim Qassem ने इन कोशिशों को बेकार बताया और लेबनान सरकार से मीटिंग रद्द करने की मांग की। जैसे ही वॉशिंगटन में बातचीत शुरू हुई, हिजबुल्लाह ने उत्तरी इसराइल पर अपने हमले और तेज कर दिए। इसराइल ने स्पष्ट किया कि उसके नागरिकों की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा और एक तय सीमा रेखा के साथ स्थायी शांति की जरूरत है।




