Abu Dhabi के Burjeel Hospital में डॉक्टरों की एक टीम ने एक ऐसी बीमारी का पता लगाया और इलाज किया जो दुनिया भर में लाखों लोगों में से सिर्फ एक या चार लोगों को होती है। इस दुर्लभ बीमारी का नाम Adult-Onset Still’s Disease (AOSD) है। 34 साल के एक मरीज को यह गंभीर समस्या थी, जिसे समय पर पहचान कर उसकी जान बचा ली गई।
मरीज को पिछले दो हफ्तों से लगातार तेज बुखार था, जिसका कोई स्पष्ट कारण समझ नहीं आ रहा था। अस्पताल की मेडिकल टीम ने जांच के बाद पाया कि यह एक ऑटोइम्यून बीमारी है। इस स्थिति में शरीर का इम्यून सिस्टम ज़रूरत से ज़्यादा सक्रिय हो जाता है और अपने ही अंगों पर हमला करने लगता है, जिससे पूरे शरीर में सूजन आ जाती है।
इलाज और सुधार
Internal Medicine के स्पेशलिस्ट डॉ. Niyas Khalid ने बताया कि मरीज को हाई-डोज कॉर्टिकोस्टेरॉइड थेरेपी दी गई। इलाज शुरू होने के 24 घंटे के अंदर मरीज का बुखार उतर गया। 48 घंटों के भीतर मरीज की हालत में काफी सुधार हुआ, उनके जोड़ों का दर्द कम हुआ और शरीर में ऊर्जा वापस आई। लैब टेस्ट की रिपोर्ट में भी सुधार देखा गया।
पहचान में आई मुश्किलें
डॉ. Khalid के अनुसार इस बीमारी को पहचानना बहुत कठिन होता है क्योंकि इसके लक्षण गंभीर संक्रमण, लिवर की बीमारी या कैंसर जैसे लगते हैं। अक्सर ऐसे इलाकों में इसे साधारण संक्रमण मान लिया जाता है जहाँ बुखार आम बात होती है। इस मामले में एक बड़ी चुनौती यह थी कि मरीज के शरीर पर कोई दाने (rash) नहीं थे। आमतौर पर किताबों में इस बीमारी के साथ दानों का ज़िक्र होता है, लेकिन गहरे रंग की त्वचा वाले लोगों में ये दाने अक्सर नहीं दिखते या इन्हें पहचानना मुश्किल होता है।
देरी होने पर हो सकता था बड़ा खतरा
डॉक्टरों ने चेतावनी दी कि अगर इस बीमारी का सही समय पर इलाज न किया जाए, तो यह जानलेवा हो सकती है। इससे शरीर के अंगों को नुकसान पहुँच सकता है, लिवर फेल हो सकता है या ‘मैक्रोफेज एक्टिवेशन सिंड्रोम’ नाम का घातक इम्यून स्टॉर्म पैदा हो सकता है। इस मरीज के मामले में समय पर इलाज मिलना उसकी जिंदगी के लिए बहुत बड़ा बदलाव साबित हुआ।