Abu Dhabi की अर्थव्यवस्था को लेकर एक बड़ी खबर आई है। Fitch Ratings ने Abu Dhabi की लॉन्ग-टर्म रेटिंग को ‘AA’ रखा है और इसे स्टेबल बताया है। इसका मतलब है कि दुनिया के कई बड़े देशों के मुकाबले Abu Dhabi पर कर्ज बहुत कम है और उसकी आर्थिक स्थिति काफी मजबूत है। ईरान युद्ध के तनाव के बावजूद यहाँ के तेल निर्यात से होने वाली कमाई ने अर्थव्यवस्था को संभाले रखा है।

Abu Dhabi की आर्थिक मजबूती और कर्ज का क्या हिसाब है

Fitch Ratings के मुताबिक Abu Dhabi के पास विदेशी संपत्ति बहुत ज्यादा है और सरकारी कर्ज बहुत कम है। Abu Dhabi Investment Authority (ADIA) की संपत्ति ने इस रेटिंग को बेहतर बनाने में बड़ी भूमिका निभाई है। यहाँ की प्रति व्यक्ति GDP भी काफी ज्यादा है जिससे सरकारी खजाने में मजबूती बनी रहती है।

विवरण Abu Dhabi (2025/26) अन्य ‘AA’ रेटिंग वाले देश (औसत)
सरकारी कर्ज (2025 के अंत तक) 19.5% of GDP 50.3% of GDP
सरकारी कर्ज (2026 अनुमान) 25.3% of GDP
विदेशी संपत्ति (2025 के अंत तक) 291% of GDP 45.4% of GDP
राजकोषीय अधिशेष (2025) 6.5% of GDP
राजकोषीय अधिशेष (2026 अनुमान) 3.0% of GDP

युद्ध के असर और भविष्य की आर्थिक स्थिति

ईरान युद्ध की वजह से 2026 में अर्थव्यवस्था में 1% की गिरावट आने का अनुमान है। इसका असर तेल और गैर-तेल दोनों क्षेत्रों पर पड़ेगा। युद्ध के खर्चों की वजह से सरकार को थोड़ा ज्यादा कर्ज लेना पड़ सकता है जिससे कर्ज 19.5% से बढ़कर 25.3% होने की संभावना है। हालांकि Fitch को उम्मीद है कि युद्धविराम के बाद Strait of Hormuz फिर से खुल जाएगा और आर्थिक विकास फिर से शुरू होगा।

रेटिंग एजेंसी ने यह भी बताया कि Abu Dhabi की अर्थव्यवस्था काफी हद तक तेल और गैस पर निर्भर है। इसके अलावा क्षेत्रीय तनाव और गवर्नेंस के कुछ पहलुओं की वजह से रेटिंग को और ऊपर ले जाने में कुछ रुकावटें हैं। फिर भी सरकारी संस्थाओं का कर्ज नियंत्रण में है और सरकार के पास पर्याप्त फंड मौजूद हैं।

Frequently Asked Questions (FAQs)

Fitch Ratings ने Abu Dhabi को ‘AA’ रेटिंग क्यों दी है

यह रेटिंग Abu Dhabi के कम सरकारी कर्ज, उच्च प्रति व्यक्ति GDP और ADIA के माध्यम से मौजूद बड़ी विदेशी संपत्तियों की वजह से दी गई है।

क्या ईरान युद्ध का Abu Dhabi की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ेगा

हाँ, अनुमान है कि 2026 में अर्थव्यवस्था 1% तक सिकुड़ सकती है और युद्ध संबंधी खर्चों के कारण सरकारी कर्ज बढ़कर 25.3% हो सकता है।