अबू धाबी अब सेहत और इलाज के क्षेत्र में दुनिया का बड़ा केंद्र बनने जा रहा है. यहाँ के स्वास्थ्य विभाग (DoH) और M42 कंपनी ने मिलकर दुर्लभ बीमारियों के इलाज के लिए जीन एडिटिंग तकनीक पर काम शुरू किया है. इस पहल का मकसद उन बीमारियों का पक्का इलाज ढूंढना है जो बहुत कम लोगों को होती हैं और जिनका इलाज मुश्किल होता है.

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बड़ी कंपनियों और अस्पतालों से हाथ मिलाया

अबू धाबी ने इस काम के लिए दुनिया की नामी संस्थाओं के साथ समझौते किए हैं. Mammoth Biosciences के साथ मिलकर CRISPR नाम की आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा. इससे नई दवाएं बनाने और मरीजों के लिए क्लिनिकल रिसर्च करने में मदद मिलेगी. इसके तहत MB-111 नाम की दवा को भी यहाँ के इलाज सिस्टम में लाया जाएगा.

साथ ही, अमेरिका के Children’s Hospital of Philadelphia (CHOP) के साथ भी साझेदारी हुई है. इसके जरिए अबू धाबी के डॉक्टरों को खास ट्रेनिंग दी जाएगी. वे लीवर, खून के जमने की समस्या और दिमाग से जुड़ी दुर्लभ बीमारियों का इलाज करना सीखेंगे.

कैलिफोर्निया के साथ नया रास्ता

अबू धाबी के स्वास्थ्य विभाग ने Biocom California के साथ भी एक समझौता किया है. इससे अबू धाबी और कैलिफोर्निया के बीच रिसर्च, निवेश और नई खोजों के लिए एक सीधा रास्ता खुल गया है. इससे दोनों तरफ के वैज्ञानिक एक-दूसरे की मदद कर सकेंगे.

जीनोम प्रोग्राम और पुराने प्रयास

इस पूरी योजना में Emirati Genome Programme की बड़ी भूमिका है. इसके तहत करीब 10 लाख लोगों के जीनोम की जांच की गई है, जिससे बीमारियों को समझने और सही इलाज खोजने में आसानी होगी. इसके अलावा HELM क्लस्टर के जरिए रिसर्च से लेकर इलाज तक की पूरी चेन को मजबूत किया जा रहा है.

अबू धाबी इससे पहले भी इस दिशा में काम कर चुका है. मार्च 2026 में आँखों की एक खास बीमारी (MerTK-related retinitis pigmentosa) के लिए ट्रायल शुरू किया गया था. वहीं जुलाई 2025 में बच्चों में होने वाली SMA1 बीमारी के इलाज के लिए रिसर्च सेंटर बनाने की योजना बनाई गई थी. M42 और Arcera ने भी मिलकर दुर्लभ बीमारियों के इलाज के लिए AI और जीनोमिक डेटा के इस्तेमाल पर सहमति जताई है.