अबू धाबी के स्वास्थ्य विभाग और M42 ने मिलकर एक बहुत बड़ी रिसर्च पूरी की है। इसमें करीब 5 लाख अमीरातियों के जीनोम की जांच की गई ताकि आंखों की गंभीर बीमारियों को समय रहते पहचाना जा सके। इस कदम से अब लोगों की रोशनी बचाने और सही इलाज करने में काफी मदद मिलेगी।
इस स्टडी से क्या पता चला और इसका क्या फायदा होगा?
इस नेशनल स्टडी के दौरान वंशानुगत दृष्टि हानि यानी विरासत में मिलने वाली आंखों की बीमारियों के करीब 100 जेनेटिक कारणों का पता चला है। अब डॉक्टर यह पहले ही जान सकेंगे कि किस व्यक्ति को भविष्य में आंखों की समस्या होने का खतरा है। इससे मरीजों को समय पर काउंसलिंग और सही इलाज मिल सकेगा जिससे उनकी सेहत बेहतर होगी।
इलाज और जांच के लिए क्या नई व्यवस्थाएं की गई हैं?
जेनेटिक जानकारी को सुरक्षित रखने और डॉक्टरों तक पहुंचाने के लिए ‘Malaffi’ प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया गया। इसके जरिए डॉक्टर मरीज की मेडिकल हिस्ट्री और जेनेटिक डेटा को जोड़कर बेहतर फैसले ले सकेंगे। साथ ही, MerTK जैसी दुर्लभ बीमारी के लिए पहली बार जीन थेरेपी ट्रायल भी शुरू किया गया है, जिसमें Cleveland Clinic Abu Dhabi जैसी संस्थाएं शामिल हैं।
| तारीख | महत्वपूर्ण अपडेट |
|---|---|
| 3 अप्रैल 2026 | अबू धाबी बायोबैंक की शुरुआत हुई |
| 24 मार्च 2026 | दुर्लभ आंखों की बीमारी के लिए पहली जीन थेरेपी ट्रायल शुरू हुआ |
| 19 फरवरी 2026 | वंशानुगत दृष्टि हानि के जोखिम पर रिपोर्ट आई |
| 21 अप्रैल 2026 | 5 लाख लोगों की जीनोम स्टडी के मुख्य नतीजे घोषित हुए |
