अबू धाबी अब अपने शहर और बुनियादी ढांचे को भविष्य के लिए तैयार कर रहा है। Abu Dhabi Department of Energy (DoE) ने इसके लिए कई रणनीतिक समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। इस पहल का मकसद शहर के विकास की रफ्तार बढ़ाना और सरकारी कामों को और आसान बनाना है ताकि आने वाले समय में आर्थिक विकास को मजबूती मिले।

प्रोजेक्ट्स के काम में तेजी लाने के लिए क्या बदलाव हुए हैं?

Abu Dhabi Infrastructure Summit (ADIS 2026) के दौरान एक नया गवर्नेंस फ्रेमवर्क तैयार किया गया है। इसके लिए DoE और Abu Dhabi Projects and Infrastructure Centre (ADPIC) के साथ 14 अन्य सरकारी संस्थाओं ने हाथ मिलाया है। अब प्रोजेक्ट्स के लिए जरूरी No Objection Certificates (NOCs) जल्दी जारी किए जाएंगे, जिससे काम में देरी नहीं होगी। इसके लिए एक जॉइंट कमेटी भी बनाई गई है जो तकनीकी समस्याओं को सुलझाएगी और मंजूरियों की प्रक्रिया को तेज करेगी।

Regulatory Affairs के डायरेक्टर जनरल Abdulaziz Mohamed Al Obaidli ने कहा कि ये समझौते सरकारी साझेदारी को मजबूत करेंगे। वहीं, Department of Municipalities and Transport के चेयरमैन Mohamed Ali Al Shorafa ने इसे अबू धाबी के लक्ष्यों को पूरा करने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया है।

कितने बड़े निवेश की तैयारी है और कौन से क्षेत्र कवर होंगे?

अबू धाबी इन्वेस्टमेंट ऑफिस और ADPIC ने मिलकर 55 अरब दिरहम के पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) प्रोजेक्ट्स का पोर्टफोलियो पेश किया है। इस निवेश का विवरण नीचे दी गई तालिका में है:

विवरण जानकारी
कुल निवेश 55 अरब दिरहम
कुल प्रोजेक्ट्स की संख्या 24 प्रोजेक्ट्स
मुख्य क्षेत्र ट्रांसपोर्ट, इंफ्रास्ट्रक्चर और सामाजिक सेवाएं
टेंडर का समय 2026 और 2027

ऊर्जा और बुनियादी ढांचा मंत्री Suhail bin Mohammed Al Mazrouei ने बताया कि अगले चार सालों में अबू धाबी यूएई में बुनियादी ढांचे पर सबसे ज्यादा खर्च करेगा। इससे न केवल शहर का विकास होगा बल्कि अर्थव्यवस्था में विविधता भी आएगी।

Frequently Asked Questions (FAQs)

यह समिट कब और कहां हुआ था

Abu Dhabi Infrastructure Summit (ADIS 2026) का आयोजन 12 से 14 मई 2026 तक Abu Dhabi National Exhibition Centre (ADNEC) में किया गया था।

नए गवर्नेंस फ्रेमवर्क से आम तौर पर क्या फायदा होगा

इस फ्रेमवर्क से सरकारी विभागों के बीच तालमेल बढ़ेगा और प्रोजेक्ट्स के लिए NOCs जल्दी मिलेंगे, जिससे सड़क, बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं तेजी से तैयार होंगी।