कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से लड़ने की दिशा में अबू धाबी ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। यहां एक ऐसा एडवांस ब्लड टेस्ट लॉन्च किया गया है, जो शरीर में लक्षण दिखने से पहले ही कैंसर का पता लगा सकता है। चिकित्सा जगत में इसे एक बड़ी क्रांति माना जा रहा है।

एक ही टेस्ट में 70 से ज्यादा कैंसर की जांच

अबू धाबी के बुर्जील (Burjeel) हॉस्पिटल्स द्वारा पेश किए गए इस टेस्ट का नाम Trucheck™ intelli है। यह एक सिंगल ब्लड टेस्ट 70 से अधिक प्रकार के कैंसर का पता लगाने में सक्षम है। इसमें पैन्क्रियाटिक (अग्नाशय), गैस्ट्रिक (पेट) और ब्रेन कैंसर जैसे जटिल कैंसर भी शामिल हैं, जिनके लिए आमतौर पर कोई रूटीन स्क्रीनिंग उपलब्ध नहीं होती है। यह तकनीक पारंपरिक तरीकों के मुकाबले कहीं ज्यादा व्यापक है।

बिना भूखे रहे होगी जांच, तुरंत मिलेंगे नतीजे

आमतौर पर मेडिकल टेस्ट के लिए मरीजों को घंटों भूखा रहना पड़ता है या कई तरह की तैयारियां करनी पड़ती हैं। लेकिन इस नए टेस्ट की खासियत यह है कि यह नॉन-इनवेसिव है और इसके लिए किसी ‘फास्टिंग’ या विशेष तैयारी की जरूरत नहीं होती। यह टेस्ट खून में मौजूद ‘सर्कुलेटिंग ट्यूमर सेल्स’ (CTCs) और कैंसर के मॉलिक्यूलर सिग्नल्स की पहचान करता है, जिससे बहुत तेजी से रिजल्ट मिल जाते हैं।

कितना सटीक है यह नया टेस्ट?

शोध के अनुसार, यह टेस्ट 95 से 98 प्रतिशत तक सटीक (Accurate) है। इसमें ‘फॉल्स पॉजिटिव’ यानी गलत रिपोर्ट आने की संभावना केवल 1 प्रतिशत है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि यह टेस्ट ल्यूकेमिया और लिंफोमा जैसे ब्लड कैंसर का पता नहीं लगा सकता, क्योंकि ये कैंसर अलग बायोलॉजिकल तरीके से काम करते हैं। इसके अलावा बाकी सॉलिड ट्यूमर के लिए यह बेहद कारगर है।

कीमत और उपलब्धता: किसे मिलेगा फायदा?

अबू धाबी अपने नागरिकों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर इस तकनीक को अपनाने वाला दुनिया का पहला देश बन गया है। यह टेस्ट विशेष रूप से 40 वर्ष से अधिक उम्र के ऐसे लोगों के लिए है जिनमें अभी कोई लक्षण नहीं दिख रहे हैं। इसकी कीमत लगभग 7,000 से 8,000 दिरहम (करीब 1.6 लाख से 1.8 लाख रुपये) के बीच है। अलग-अलग कैंसर के लिए कई टेस्ट कराने के मुकाबले यह एक टेस्ट काफी किफायती माना जा रहा है।

क्या अब पुराने टेस्ट की जरूरत नहीं पड़ेगी?

विशेषज्ञों ने साफ किया है कि यह टेस्ट नई तकनीक जरूर है, लेकिन यह पुराने स्क्रीनिंग तरीकों की जगह नहीं लेगा। बुर्जील कैंसर इंस्टीट्यूट के सीईओ प्रो. हुमैद अल शम्सी के मुताबिक, इस ब्लड टेस्ट को मैमोग्राम (ब्रेस्ट कैंसर), कोलोनोस्कोपी और सर्वाइकल स्क्रीनिंग के साथ एक पूरक (Complementary) टेस्ट के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि उनके विकल्प के तौर पर।

Last Updated: 19 January 2026

GulfHindi Desk

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