Abu Dhabi की NYU यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने कैंसर के इलाज में एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। वैज्ञानिकों ने ऐसे स्मार्ट मॉलिक्यूल्स तैयार किए हैं जो दिमाग के ट्यूमर को पहचानने और उसका इलाज करने में मदद करेंगे। यह नई तकनीक कैंसर के मरीजों के लिए ज्यादा सुरक्षित और सटीक विकल्प बन सकती है।
ये स्मार्ट मॉलिक्यूल्स कैसे काम करते हैं?
ये मॉलिक्यूल्स शरीर के स्वस्थ हिस्सों में शांत रहते हैं, लेकिन जैसे ही ये ट्यूमर के अम्लीय (acidic) माहौल में पहुँचते हैं, सक्रिय हो जाते हैं। सक्रिय होने के बाद ये मैंगनीज आयन छोड़ते हैं, जिससे MRI स्कैन में ट्यूमर की तस्वीर एकदम साफ नजर आती है। इसी के साथ ये आयन कैंसर कोशिकाओं को नुकसान पहुँचाकर उन्हें खत्म करने का काम भी करते हैं।
पुरानी दवाओं के मुकाबले यह तकनीक क्यों बेहतर है?
MRI स्कैन के लिए आमतौर पर गैडोलिनियम का इस्तेमाल होता है, जो शरीर में जमा होकर साइड इफेक्ट्स पैदा कर सकता है। इसकी जगह अब मैंगनीज का उपयोग किया गया है, जो शरीर के लिए ज्यादा सुरक्षित माना जाता है। NYU Abu Dhabi के प्रोफेसर अली तरबल्सी और शोधकर्ता फराह बेनयेटौ की टीम ने बताया कि यह सिस्टम ब्लड-ब्रेन बैरियर को पार कर सीधे खतरनाक ग्लियोब्लास्टोमा ट्यूमर तक पहुँच सकता है।
क्या यह इलाज अब मरीजों के लिए उपलब्ध है?
इस खोज की जानकारी 7 अप्रैल 2026 को Journal of the American Chemical Society में प्रकाशित हुई थी। अभी तक इसका सफल परीक्षण सेल कल्चर और जानवरों पर किया गया है, जहाँ ट्यूमर की बढ़त धीमी हुई और सुरक्षा के नतीजे अच्छे रहे। हालांकि, इंसानों पर इसके असर और पूरी तरह सुरक्षित होने की पुष्टि के लिए अभी क्लिनिकल ट्रायल की जरूरत है।