Iran War Update: एशिया के देशों की बढ़ेगी मुसीबत, ADB ने दी चेतावनी, महंगाई होगी ज़्यादा और ग्रोथ में आएगी गिरावट
ईरान और मिडिल ईस्ट में चल रहा युद्ध अब पूरी दुनिया के लिए सिरदर्द बन रहा है. Asian Development Bank (ADB) ने चेतावनी दी है कि अगर यह लड़ाई जारी रही, तो एशिया-पैसिफिक इलाके की आर्थिक हालत बिगड़ सकती है. इससे न केवल विकास की रफ्तार धीमी होगी, बल्कि आम लोगों की जेब पर महंगाई का बोझ भी बढ़ेगा.
ग्रोथ और महंगाई पर क्या होगा असर?
ADB के मुताबिक, अगर युद्ध लंबा खिंचता है, तो एशिया-पैसिफिक की ग्रोथ 5.4% से घटकर 4.7% पर आ सकती है. सबसे बड़ी चिंता महंगाई को लेकर है, जो 2025 के 3% के मुकाबले 2026 में बढ़कर 5.6% तक पहुँच सकती है. अगर यह जंग पूरे एक साल तक चली, तो क्षेत्र की ग्रोथ में करीब 1.3 प्रतिशत की बड़ी गिरावट आ सकती है.
| विवरण | 2025 (अनुमान) | 2026 (युद्ध की स्थिति में) |
|---|---|---|
| आर्थिक ग्रोथ (Growth) | 5.4% | 4.7% |
| महंगाई (Inflation) | 3% | 5.6% |
महंगाई बढ़ने के मुख्य कारण क्या हैं?
ADB ने बताया कि युद्ध की वजह से एनर्जी की कीमतें बढ़ेंगी और सामान पहुँचाने वाली सप्लाई चेन में रुकावट आएगी. इसका असर सिर्फ तेल पर ही नहीं, बल्कि खाद और पेट्रोकेमिकल्स की कीमतों पर भी पड़ेगा, जिससे खेती और फैक्ट्रियों में मुश्किल होगी. इसके अलावा, पर्यटन और विदेशों से आने वाले पैसे (Remittances) पर भी बुरा असर पड़ सकता है.
बचाव के लिए क्या उपाय बताए गए हैं?
ADB के प्रेसिडेंट Masato Kanda और चीफ इकोनॉमिस्ट Albert Park ने सरकारों को सलाह दी है कि वे बाज़ार के तनाव को कम करें. उन्होंने कुछ ज़रूरी बातें बताई हैं:
- गरीब और कमज़ोर लोगों को बचाने के लिए सरकार समय पर आर्थिक मदद दे.
- सेंट्रल बैंकों को महंगाई पर कड़ी नज़र रखनी चाहिए ताकि बाज़ार में उथल-पुथल न हो.
- जहाँ मुमकिन हो, वहां एनर्जी की मांग को कम करने की कोशिश की जाए.
- बाजार के संकेतों को दबाने के बजाय उन्हें स्थिर रखने पर ध्यान दिया जाए.




