Middle East में बढ़ते तनाव ने अब एशिया के देशों की चिंता बढ़ा दी है। Asian Development Bank (ADB) ने चेतावनी दी है कि अगर यह लड़ाई लंबी खिंची, तो भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों में आने वाला पैसा यानी Remittances कम हो सकता है। इसका सीधा असर आम लोगों के खर्च करने की क्षमता और वहां की आर्थिक स्थिरता पर पड़ेगा।

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मिडिल ईस्ट विवाद से अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा?

ADB की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष की वजह से ऊर्जा सुरक्षा और व्यापार पर बुरा असर पड़ा है। अगर हालात एक महीने में सुधर जाते हैं, तो एशिया और प्रशांत क्षेत्र की आर्थिक ग्रोथ 2026 और 2027 में 5.1% रह सकती है, जो 2025 में 5.4% थी। लेकिन अगर यह तनाव 2026 की तीसरी तिमाही तक चलता रहा, तो ग्रोथ गिरकर 4.7% तक आ सकती है। ADB के चीफ इकोनॉमिस्ट Albert Park ने बताया कि अगर युद्ध जल्द खत्म होता है, तो कुल क्षेत्रीय विकास में 0.1% की कमी आएगी।

विवरण आंकड़ा / डेटा
2025 की आर्थिक ग्रोथ 5.4%
2026-27 ग्रोथ (अगर हालात जल्दी सुधरे) 5.1%
2026 ग्रोथ (अगर तनाव जारी रहा) 4.7%
2027 ग्रोथ (अगर तनाव जारी रहा) 4.8%
कुल क्षेत्रीय विकास में संभावित कमी 0.1%
Remittances में संभावित गिरावट 20% तक
विवाद तेज होने की तारीख 28 फरवरी 2026

प्रवासियों और उनकी कमाई पर क्या खतरा है?

खाड़ी देशों में काम करने वाले लाखों प्रवासी मजदूरों के लिए यह समय मुश्किल भरा हो सकता है। Inkstick Media की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान युद्ध की वजह से लेबर माइग्रेशन पैटर्न बदल गया है, जिससे कई मजदूर वापस लौट रहे हैं और नए लोगों की भर्ती रुक गई है। इससे घर भेजे जाने वाले पैसे में 20% तक की कमी आ सकती है। ADB के रीजनल लीड इकोनॉमिस्ट James Villafuerte ने चेतावनी दी कि इससे फिलीपींस जैसे देशों के लाखों कामगारों की रोजी-रोटी पर असर पड़ेगा। वहीं, बांग्लादेश से मिडिल ईस्ट जाने वाली कई फ्लाइट्स भी रद्द हुई हैं, जिससे वहां जाने वाले मजदूरों को परेशानी हो रही है।

ADB की तरफ से क्या मदद मिलने वाली है?

हालात को देखते हुए ADB के प्रेसिडेंट Masato Kanda ने एक फाइनेंशियल सपोर्ट पैकेज का ऐलान किया है। यह पैकेज उन विकासशील देशों की मदद करेगा जो इस संघर्ष की वजह से आर्थिक संकट झेल रहे हैं। इसमें बजट सपोर्ट और ट्रेड व सप्लाई चेन फाइनेंस जैसी सुविधाएं शामिल होंगी ताकि देशों को आर्थिक झटकों से बचाया जा सके।

Frequently Asked Questions (FAQs)

मिडिल ईस्ट तनाव का एशिया के देशों पर क्या असर होगा?

इससे ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार और प्रवासियों द्वारा घर भेजे जाने वाले पैसे (Remittances) में कमी आएगी, जिससे भारत, बांग्लादेश और फिलीपींस जैसे देशों की आर्थिक ग्रोथ गिर सकती है।

प्रवासियों के लिए क्या समस्या खड़ी हो गई है?

ईरान युद्ध की वजह से खाड़ी देशों में कामगारों का जाना कम हो गया है और कई लोग वापस लौट रहे हैं, जिससे उनकी कमाई और घर भेजे जाने वाले पैसे में 20% तक की गिरावट आ सकती है।