यूएई की सरकारी तेल कंपनी ADNOC के मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO डॉ. सुल्तान अल जाबेर ने वैश्विक ऊर्जा संकट और क्षेत्रीय तनाव के बीच एक बड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा है कि मौजूदा समय में एनर्जी को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब मिडिल ईस्ट में तेल की बुनियादी सुविधाओं को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। इस तनाव का सीधा असर खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीय प्रवासियों और वैश्विक तेल बाज़ारों पर पड़ने की संभावना है।
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ADNOC सीईओ ने ऊर्जा संकट पर क्या कहा?
डॉ. सुल्तान अल जाबेर ने अपने बयान में जोर दिया कि मौजूदा हालात में भरोसेमंद साझेदारी ही असली रणनीतिक रिजर्व है। उन्होंने दुनिया भर के नेताओं से अपील की है कि वे छोटी अवधि की उथल-पुथल से आगे बढ़कर देखें। डॉ. जाबेर के अनुसार, ऊर्जा की आपूर्ति में आ रही बाधाएं जानबूझकर पैदा की जा रही हैं ताकि वैश्विक बाज़ारों को अस्थिर किया जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि सुरक्षित ऊर्जा सप्लाई के लिए मजबूत और दीर्घकालिक संबंधों की जरूरत है।
मिडिल ईस्ट में तेल सप्लाई पर क्या है ताज़ा अपडेट?
क्षेत्रीय संघर्ष के कारण खाड़ी देशों में ऊर्जा के बुनियादी ढांचे पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है। 17 मार्च 2026 को ईरान की ओर से यूएई की तेल सुविधाओं पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए गए थे, जिसके बाद सुरक्षा बढ़ा दी गई है। वर्तमान स्थिति को नीचे दिए गए बिंदुओं से समझा जा सकता है:
- फुजैराह और शाह गैस फील्ड जैसे महत्वपूर्ण ठिकानों को हमलों में निशाना बनाया गया।
- 11 मार्च 2026 से हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को टैंकरों की आवाजाही के लिए बंद कर दिया गया है।
- ADNOC ने पुष्टि की है कि हमलों और भारी तनाव के बावजूद उनके तेल और गैस परिचालन का काम जारी है।
- अमेरिका के सहयोगियों पर आर्थिक दबाव बनाने के लिए ऊर्जा बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।
- टैंकरों की आवाजाही रुकने से आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वैश्विक स्तर पर उछाल आ सकता है।
