ADNOC चीफ का बड़ा बयान, होर्मुज जलडमरूमध्य को बिना शर्त खोलने की मांग, 230 तेल जहाजों का रास्ता बंद
संयुक्त अरब अमीरात की बड़ी तेल कंपनी ADNOC के मैनेजिंग डायरेक्टर और यूएई के मंत्री डॉ. सुल्तान अल जाबेर ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को तुरंत और बिना किसी शर्त के खोलने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते पर ईरान द्वारा शर्तें थोपना और जहाजों को रोकना पूरी तरह गलत है। इस रुकावट की वजह से दुनिया भर में तेल की सप्लाई पर असर पड़ रहा है और करीब 230 तेल से लदे जहाज इस रास्ते के खुलने का इंतजार कर रहे हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य में फिलहाल क्या स्थिति है?
डॉ. सुल्तान अल जाबेर ने बताया कि हालांकि अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच युद्धविराम की खबरें आई हैं, लेकिन इसके बावजूद होर्मुज का रास्ता पूरी तरह नहीं खुला है। ईरान की सेना जहाजों को आने-जाने के लिए अपनी अनुमति लेने के लिए मजबूर कर रही है। उन्होंने इसे एक तरह का आर्थिक आतंकवाद बताया है क्योंकि यह रास्ता किसी देश का नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत आता है। ईरान के इस नियंत्रण की वजह से तेल के बाजार में अस्थिरता आ रही है और सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है।
इस विवाद से जुड़ी कुछ बड़ी बातें जो आपको जाननी चाहिए
यूएई और 21 अन्य देशों ने मिलकर ईरान की इस हरकत की आलोचना की है। डॉ. सुल्तान अल जाबेर के अनुसार, समुद्र में आवाजाही का अधिकार सभी को है और इसे किसी राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। नीचे दी गई टेबल में इस मामले की मुख्य जानकारियां दी गई हैं:
| मुख्य विषय | जानकारी |
|---|---|
| बयान देने वाले अधिकारी | डॉ. सुल्तान अल जाबेर (ADNOC CEO) |
| फंसे हुए जहाजों की संख्या | लगभग 230 तेल टैंकर |
| प्रमुख चिंता | सप्लाई में देरी और तेल की बढ़ती कीमतें |
| विरोध करने वाले देश | यूएई, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, जापान समेत 21 देश |
| हालिया हमला | हबशान गैस कॉम्प्लेक्स पर 3 और 8 अप्रैल को हमले हुए |
प्रवासियों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर क्या असर होगा?
जब भी होर्मुज जैसे रास्ते पर तनाव बढ़ता है, तो इसका असर खाड़ी देशों में रहने वाले लोगों और वहां से व्यापार करने वालों पर पड़ता है। तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से महंगाई बढ़ सकती है, जिसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर होगा। संयुक्त राष्ट्र के नियमों के अनुसार यह रास्ता सभी जहाजों के लिए खुला रहना चाहिए। यूएई सरकार ने स्पष्ट किया है कि ईरान को बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान के लिए जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए और अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करना चाहिए।




