Iran में अमेरिकी और इजरायली हमलों के बाद वहां काम कर रहे और रह रहे अफगान नागरिकों के लिए बड़ा संकट खड़ा हो गया है। अपनी जान बचाने के लिए हर दिन करीब 30 हजार अफगान शरणार्थी ईरान छोड़कर वापस अफगानिस्तान लौट रहे हैं। United Nations की शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) के मुताबिक लोग एक युद्ध से बचकर दूसरे युद्ध वाले हालात में जाने को मजबूर हैं। ईरान सरकार ने भी बिना डॉक्युमेंट वाले प्रवासियों को मार्च के अंत तक देश छोड़ने का कड़ा निर्देश जारी किया है।
ईरान से अफगानिस्तान लौटने वालों का आंकड़ा क्या है?
हमले शुरू होने के बाद से दोनों देशों के बॉर्डर पार करने वालों की संख्या में अचानक से भारी उछाल आया है। आधिकारिक रिपोर्ट से जुड़ी कुछ प्रमुख जानकारी इस प्रकार है:
- बढ़ता आंकड़ा: पहले हर दिन करीब 5,000 लोग बॉर्डर पार करते थे, लेकिन अब यह संख्या बढ़कर करीब 30,000 प्रतिदिन हो गई है।
- कुल वापसी: मार्च 2026 की शुरुआत तक 86,253 से ज्यादा अफगान नागरिक ईरान से लौट चुके हैं। अक्टूबर 2023 के बाद से यह आंकड़ा 54 लाख (5.4 मिलियन) के पार जा चुका है।
- परिवारों का पलायन: पहले केवल काम की तलाश में गए युवा वापस आते थे, लेकिन अब पूरे परिवार लौट रहे हैं। इनमें 6 प्रतिशत महिलाएं और 10 प्रतिशत बच्चे शामिल हैं।
- वापसी का खर्च: ईरान की नीति के अनुसार डिपोर्ट किए जा रहे प्रवासियों को वापसी का खर्च खुद उठाना पड़ रहा है, जो कि लगभग 1.5 मिलियन रियाल तय किया गया है।
बॉर्डर पर कैसी हैं हालात और क्या आ रही हैं मुश्किलें?
शरणार्थियों की इस भारी भीड़ से बॉर्डर पर स्थिति काफी गंभीर हो गई है। IOM के डायरेक्टर जनरल ने कहा है कि अफगानिस्तान अकेले इतने बड़े संकट को नहीं संभाल सकता है। बॉर्डर पर लौट रहे लोगों को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है:
- इंटरनेट ब्लैकआउट: ईरान में इंटरनेट सेवाएं लगभग बंद कर दी गई हैं। इस कारण शरणार्थी अफगानिस्तान में अपने परिवारों से बात नहीं कर पा रहे हैं।
- मदद में दिक्कत: हाल ही में हुए हमलों में बॉर्डर के पास मौजूद Omari ट्रांजिट सेंटर और Takhtapul रिसेप्शन सेंटर को काफी नुकसान पहुंचा है, जिससे मदद के काम में बाधा आ रही है।
- परिवहन और सामान: Islam Qala और Milak बॉर्डर पर हजारों लोग बस के जरिए पहुंच रहे हैं। कई लोग घबराहट में अपना सामान भी पीछे छोड़ आए हैं।
- फंडिंग की कमी: UNHCR ने 2026 के लिए लौटने वालों की मदद के वास्ते 216 मिलियन डॉलर की मांग की है, लेकिन अभी तक केवल 8 प्रतिशत पैसा ही मिल पाया है।
