Afghanistan और Pakistan के बॉर्डर पर मची जंग ने हजारों परिवारों को बेघर कर दिया है। लोग अब खुले आसमान के नीचे टेंटों में रहने को मजबूर हैं, जहां भोजन और इलाज जैसी बुनियादी सुविधाएं तक नहीं मिल पा रही हैं। यह संकट अब एक बड़ी मानवीय त्रासदी का रूप लेता जा रहा है जिससे आम लोगों की जिंदगी तबाह हो गई है।
लड़ाई का असर और जान-माल का नुकसान
इस संघर्ष में बड़ी संख्या में आम नागरिक प्रभावित हुए हैं। Afghan सरकार के मुताबिक, फरवरी से अप्रैल के बीच हुई झड़पों में सैकड़ों लोग मारे गए और हजारों परिवार अपनी जमीन छोड़ने पर मजबूर हुए। वहीं, UN की रिपोर्ट के अनुसार पूर्वी Afghanistan में 94,000 से ज्यादा लोग नए सिरे से विस्थापित हुए हैं।
| विवरण | आंकड़ा |
|---|---|
| नागरिकों की मौत | 761 |
| घायल लोग | 621 |
| विस्थापित परिवार | 27,407 |
| दागे गए मिसाइल और गोले | करीब 15,000 |
| कुल नए विस्थापित (UN रिपोर्ट) | 94,000 से ज्यादा |
| पाकिस्तान से निकाले गए शरणार्थी | 5,450 |
| ईरान से निकाले गए शरणार्थी | 352 |
पाकिस्तान से निर्वासन और अंतरराष्ट्रीय कोशिशें
पाकिस्तान सरकार ने बड़ी संख्या में Afghan शरणार्थियों को वापस भेजा है, जिसे Refugees International जैसी संस्थाओं ने गैरकानूनी बताया है। Pakistan का दावा है कि वह TTP और ISIS-K जैसे आतंकी समूहों को निशाना बना रहा है। इस तनाव को कम करने के लिए China ने बीच-बचाव किया और दोनों देश विवाद को न बढ़ाने पर सहमत हुए हैं।
शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का बुरा हाल
जंग की वजह से बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह ठप हो गई है। OCHA के मुताबिक, करीब 12,000 छात्र स्कूल नहीं जा पा रहे हैं और 22 स्कूलों को फिर से बनाने की सख्त जरूरत है। इसके अलावा, बॉर्डर इलाकों में बिना फटे बमों (UXO) और भारी बारिश व बाढ़ ने राहत कार्यों को और मुश्किल बना दिया है। UNICEF और UNAMA जैसी संस्थाएं वहां स्वास्थ्य और पोषण पहुंचाने की कोशिश कर रही हैं।
