अफगानिस्तान की अर्थव्यवस्था में एक बहुत बड़ा बदलाव आया है। तालिबान सरकार ने देश के बैंकिंग सिस्टम से ब्याज यानी रिबा को पूरी तरह हटाने का फैसला किया है। अब देश पूरी तरह से इस्लामी बैंकिंग मॉडल की ओर बढ़ रहा है ताकि वित्तीय कामकाज शरीयत के नियमों के हिसाब से हो सके।

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अफगानिस्तान में बैंकिंग व्यवस्था में क्या बदलाव हुए हैं?

दा अफगानिस्तान बैंक (DAB) के मुताबिक अब देश में पारंपरिक बैंकिंग सिस्टम पूरी तरह बंद हो गया है। सभी कमर्शियल बैंक अब इस्लामी अनुबंधों के आधार पर ही अपनी सेवाएं दे रहे हैं। बैंक के अधिकारियों का कहना है कि यह सिर्फ एक औपचारिक बदलाव नहीं है, बल्कि एक गहरा ढांचागत परिवर्तन है। इसका मकसद देश की आर्थिक प्रणाली से ब्याज के हर पहलू को खत्म करना है।

इस नई व्यवस्था में बैंक और ग्राहक एक पार्टनर की तरह काम करते हैं। इसमें केवल पैसा उधार देकर ब्याज कमाने के बजाय व्यापार और साझेदारी पर जोर दिया जाता है, जहाँ लाभ और हानि दोनों को आपस में साझा किया जाता है।

महत्वपूर्ण तारीखें और आधिकारिक घोषणाएं

इस बदलाव को लागू करने के लिए सरकार और केंद्रीय बैंक ने कई कदम उठाए हैं। नीचे दी गई तालिका में मुख्य जानकारियों का विवरण है:

तारीख/समय विवरण
दिसंबर 2023 केंद्रीय बैंक प्रमुख हेदयातुल्ला बदरी ने इस्लामी ढांचे की योजना की घोषणा की
19 नवंबर 2025 उप-गवर्नर सेदिकुल्लाह खालिद ने इस्लामी बैंकिंग को आगे बढ़ाने पर चर्चा की
20 नवंबर 2025 पारंपरिक बैंकिंग प्रणाली पूरी तरह बंद होने की घोषणा हुई
14 अप्रैल 2026 सभी बैंकों में ब्याज-आधारित प्रणाली को आधिकारिक तौर पर निलंबित किया गया
17-19 अप्रैल 2026 विभिन्न स्रोतों ने इस संक्रमण और बदलाव की पुष्टि की
नियामक ढांचा DAB ने इस्लामी वित्तीय संस्थानों के लिए लेखांकन और अंकेक्षण नियम जारी किए
कानूनी समिति बैंकिंग कानून को संशोधित करने के लिए सात सदस्यीय समिति का गठन किया गया

इस फैसले के प्रभाव और आने वाली चुनौतियां क्या हैं?

ओमान के ग्रैंड मुफ्ती ने इस कदम को ऐतिहासिक बताया है और अन्य मुस्लिम देशों से भी ऐसा करने की अपील की है। वैश्विक स्तर पर भी इस्लामी वित्त तेजी से बढ़ रहा है और अनुमान है कि 2029 तक इसकी संपत्ति 9.7 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है।

हालांकि, इस बदलाव में कुछ मुश्किलें भी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि लोगों में जागरूकता की कमी, शरिया नियमों पर विद्वानों के बीच सहमति का अभाव और पूंजी निवेश की कमी बड़ी चुनौतियां साबित हो सकती हैं। वर्तमान में राष्ट्रीय बैंकिंग प्रणाली कमजोर स्थिति में है, जिसे सुधारने का काम जारी है।

Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.