अगर आप विदेश जाने की तैयारी कर रहे हैं तो यह खबर आपके लिए है। एयर इंडिया ने अपनी कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को कम करने का फैसला किया है। ईंधन की कीमतों में भारी बढ़ोतरी और airspace की पाबंदियों की वजह से कंपनी को यह कदम उठाना पड़ा। इससे आने वाले समय में यात्रियों की परेशानी बढ़ सकती है और टिकटों की उपलब्धता कम हो सकती है।
एयर इंडिया ने फ्लाइट्स क्यों कम कीं और किन रूटों पर पड़ेगा असर?
Air India के CEO Campbell Wilson ने बताया कि अप्रैल और मई के महीने में पहले ही कई उड़ानें कम की गई थीं। अब जून और जुलाई 2026 के लिए भी शेड्यूल में कटौती की योजना है। इसका मुख्य कारण जेट ईंधन की कीमतों में आया अचानक उछाल है। कंपनी हर दिन लगभग 100 फ्लाइट्स कम कर सकती है, जो उनके कुल शेड्यूल का करीब 10% है।
- सबसे ज्यादा असर यूरोप, उत्तरी अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और सिंगापुर जाने वाली लंबी दूरी की उड़ानों पर पड़ेगा।
- ईंधन महंगा होने की वजह से कई अंतरराष्ट्रीय रूट अब मुनाफे वाले नहीं रहे।
- पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण airspace की पाबंदियां भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।
सरकार से क्या मदद मांगी और कंपनी की आर्थिक हालत क्या है?
Federation of Indian Airlines (FIA), जिसमें Air India, IndiGo और SpiceJet शामिल हैं, ने Ministry of Civil Aviation से मदद की गुहार लगाई है। FIA ने मांग की है कि ATF (Aviation Turbine Fuel) पर लगने वाली 11% एक्साइज ड्यूटी को फिलहाल टाल दिया जाए। सरकार ने घरेलू ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी को 25% तक सीमित रखा है, जिससे घरेलू उड़ानों को कुछ राहत मिली है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए ऐसा कोई सहारा नहीं मिला है।
कंपनी की वित्तीय स्थिति भी काफी नाजुक रही है। नीचे दी गई तालिका में एयर इंडिया और ईंधन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दी गई है:
| विवरण | आंकड़े / जानकारी |
|---|---|
| कुल घाटा (FY ending March 31, 2026) | ₹22,000 करोड़ से अधिक |
| औसत जेट ईंधन कीमत (April 24, 2026) | $179.46 प्रति बैरल |
| ईंधन कीमतों में बढ़ोत्तरी (फरवरी से अप्रैल) | 80% |
| दैनिक फ्लाइट कटौती | लगभग 100 उड़ानें (10%) |
| घरेलू ईंधन मूल्य सीमा (Govt Cap) | 25% |
| नया फ्यूल सरचार्ज लागू होने की तारीख | 8 अप्रैल, 2026 |
इसके अलावा, CEO Campbell Wilson ने यह भी जानकारी दी है कि वह इस साल के अंत में अपने पद से हट जाएंगे। उन्होंने कहा कि हवाई किराए बढ़ाने और फ्यूल सरचार्ज लगाने की एक सीमा होती है, क्योंकि इसके बाद ग्राहक सफर करना कम कर देते हैं।
Frequently Asked Questions (FAQs)
किन देशों की फ्लाइट्स पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा?
सबसे ज्यादा कटौती लंबी दूरी के अंतरराष्ट्रीय रूटों पर होगी, जिनमें मुख्य रूप से यूरोप, उत्तरी अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और सिंगापुर शामिल हैं।
घरेलू फ्लाइट्स पर इसका क्या असर होगा?
घरेलू उड़ानें कम प्रभावित होंगी क्योंकि भारत सरकार ने घरेलू ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी को 25% तक सीमित कर दिया है।