हवाई सफर करने वालों के लिए आने वाले दिनों में जेब ढीली करनी पड़ सकती है। अगर आप भी खाड़ी देशों से भारत आने वाले हैं या देश के भीतर हवाई यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बहुत जरूरी है। एयर इंडिया, इंडिगो और एयर इंडिया एक्सप्रेस जैसी बड़ी एयरलाइंस जून से अगस्त 2026 के बीच करीब 250 घरेलू उड़ानों की कटौती करने जा रही हैं। इस कटौती और महंगे जेट फ्यूल की वजह से हवाई टिकटों की कीमतें काफी बढ़ने वाली हैं।
आखिर क्यों कम की जा रही हैं उड़ानें और क्यों बढ़ रहा है किराया?
हवाई ईंधन यानी एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। एयरलाइंस के कुल खर्च का लगभग 40% से 60% हिस्सा केवल ईंधन पर खर्च होता है। मध्य पूर्व में जारी तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 25% तक की वृद्धि हुई है, जिसका सीधा असर जेट फ्यूल पर पड़ा है। इसके अलावा, ईरानी और पाकिस्तानी हवाई क्षेत्रों पर लगे प्रतिबंधों के कारण उड़ानों के रूट लंबे हो गए हैं, जिससे ईंधन की खपत बढ़ गई है। इंडिगो ने उड़ानों में कटौती का एक कारण गर्मियों की छुट्टियों के बाद कमजोर मांग को भी बताया है।
आम यात्रियों पर कितना पड़ेगा असर?
घरेलू उड़ानों की संख्या में कमी आने से टिकटों की कीमतों में 30% से 35% तक की बढ़ोतरी होने की आशंका जताई जा रही है। एयरलाइंस ने पहले ही यात्रियों पर करीब ₹400 से ₹450 तक का अतिरिक्त फ्यूल सरचार्ज लगाना शुरू कर दिया है। इससे पहले मार्च 2026 में भी जेट फ्यूल महंगा होने की वजह से घरेलू टिकटों पर ₹425 और अंतरराष्ट्रीय टिकटों पर ₹2,300 तक का अतिरिक्त शुल्क बढ़ाया गया था। भारत में हवाई किराया पूरी तरह से डायनेमिक प्राइसिंग पर आधारित होता है, जिसका मतलब है कि मांग और आपूर्ति के आधार पर कीमतें तय होती हैं। सरकार सीधे तौर पर किराया नियंत्रित नहीं करती है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को हवाई किराए में यात्रियों को राहत देने के लिए कदम उठाने का निर्देश दिया है।
उड़ानों और किराए से जुड़े कुछ प्रमुख आंकड़े
हवाई किराए और उड़ानों की कटौती से जुड़े महत्वपूर्ण आंकड़े नीचे दी गई तालिका में देखे जा सकते हैं।
| बदलाव का कारण | असर और आंकड़े |
|---|---|
| दैनिक उड़ानों में कटौती (जून-अगस्त 2026) | लगभग 250 घरेलू उड़ानें रोज कम होंगी |
| घरेलू टिकट की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी | 30% से 35% तक की वृद्धि |
| अतिरिक्त फ्यूल सरचार्ज | ₹400 से ₹450 तक |
| तेल की कीमतों में वृद्धि (मिडल ईस्ट तनाव के कारण) | 25% तक की बढ़ोतरी |
| कुल परिचालन लागत में ईंधन का हिस्सा (ICRA रिपोर्ट) | 40% से बढ़कर 60% हुआ |
| अंतरराष्ट्रीय जेट फ्यूल कीमतों में बढ़ोतरी (1 मई 2026) | 5% की वृद्धि |
Frequently Asked Questions (FAQs)
क्या सरकार हवाई टिकट की कीमतों को नियंत्रित करती है?
भारत में नागरिक उड्डयन बाजार डीरेगुलेटेड है। सरकार या डीजीसीए सीधे तौर पर हवाई किराया तय नहीं करते हैं। किराया पूरी तरह से मांग, आपूर्ति और ईंधन की कीमतों जैसे बाहरी कारकों पर निर्भर करता है।
उड़ानों में इस कटौती से खाड़ी देशों के यात्रियों पर क्या असर पड़ेगा?
घरेलू उड़ानों में कटौती से भारत के कनेक्टिंग रूट्स महंगे हो जाएंगे। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय जेट फ्यूल की कीमतों में 5% बढ़ोतरी के कारण खाड़ी देशों से भारत आने वाली सीधी उड़ानें भी महंगी होने की पूरी संभावना है।