एयर इंडिया ने आम यात्रियों के लिए हवाई सफर को सस्ता करने की तैयारी कर ली है। कंपनी ने घरेलू उड़ानों के लिए एक नया ‘बेसिक’ किराया वर्ग शुरू किया है। इसमें उन लोगों को फायदा मिलेगा जो कम पैसे खर्च करके यात्रा करना चाहते हैं और जिन्हें उड़ान के दौरान खाने की ज़रूरत नहीं है। यह सुविधा 16 जून 2026 से लागू कर दी गई है।
क्या है नया ‘बेसिक’ किराया विकल्प
एयर इंडिया ने मंगलवार, 16 जून 2026 को इकोनॉमी क्लास के यात्रियों के लिए यह नया विकल्प पेश किया। इस किराए में सबसे बड़ा बदलाव यह है कि यात्रियों को उड़ान के दौरान मुफ्त भोजन नहीं मिलेगा। हालांकि, बुनियादी पेय जैसे चाय या कॉफी मुफ्त दी जाएगी। जो यात्री खाना चाहते हैं, वे अपनी उड़ान से 24 घंटे पहले शाकाहारी, मांसाहारी, जैन या डायबिटिक भोजन का विकल्प चुनकर उसे खरीद सकते हैं।
सफर और सामान के नियम
नया किराया चुनने वाले यात्रियों को सामान ले जाने की वही सुविधा मिलेगी जो सामान्य तौर पर मिलती है। इसमें 15 किलोग्राम चेक-इन बैगेज और 7 किलोग्राम केबिन बैगेज की अनुमति होगी। यदि उड़ान के समय में कोई बदलाव होता है, तो पहले से खरीदा गया भोजन नई फ्लाइट में ट्रांसफर कर दिया जाएगा, वरना पूरा पैसा वापस मिल जाएगा।
टिकट बुकिंग और अन्य विकल्प
यह नया किराया विकल्प पूरी तरह से वैकल्पिक है। यात्री एयर इंडिया की वेबसाइट, मोबाइल ऐप, कांटेक्ट सेंटर या एयरपोर्ट के टिकट ऑफिस से इसे बुक कर सकते हैं। जिन लोगों को मुफ्त भोजन और अन्य सुविधाएं चाहिए, वे पहले की तरह ‘वैल्यू’, ‘क्लासिक’ और ‘फ्लेक्स’ श्रेणियों का चुनाव कर सकते हैं। ध्यान रहे कि ‘बेसिक’ किराए में टिकट कैंसिल करने या बदलने के नियम पुराने विकल्पों के मुकाबले ज़्यादा सख्त हो सकते हैं।
मुख्य जानकारी एक नज़र में
| सुविधा/नियम | विवरण |
|---|---|
| लागू होने की तारीख | 16 जून, 2026 |
| मुफ्त भोजन | शामिल नहीं है |
| मुफ्त पेय | चाय और कॉफी उपलब्ध |
| चेक-इन बैगेज | 15 किलोग्राम |
| केबिन बैगेज | 7 किलोग्राम |
| भोजन प्री-ऑर्डर | उड़ान से 24 घंटे पहले तक |
| बुकिंग माध्यम | वेबसाइट, ऐप, कांटेक्ट सेंटर, एयरपोर्ट |
| अन्य किराया श्रेणियां | वैल्यू, क्लासिक और फ्लेक्स |
एयर इंडिया ने बताया कि यह कदम उन यात्रियों के लिए उठाया गया है जो कम खर्च में यात्रा करना चाहते हैं। फिलहाल इसे कुछ चुनिंदा घरेलू रूटों पर पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया गया है। यह फैसला बढ़ती लागत और कम बजट वाली एयरलाइंस से मिल रही चुनौती को देखते हुए लिया गया है।