अल-अक्सा मस्जिद में घुसे इजरायली सेटलर्स, कुवैत ने जताया कड़ा विरोध, संयुक्त राष्ट्र से मांगी मदद
कुवैत के विदेश मंत्रालय ने अल-अक्सा मस्जिद परिसर में इजरायली सेटलर्स के घुसने की कड़ी निंदा की है। यह घटना इजरायली सुरक्षा बलों की मौजूदगी में हुई, जिसे अंतरराष्ट्रीय कानूनों का खुला उल्लंघन बताया गया है। मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि ऐसी हरकतों से दुनिया भर के मुसलमानों में गुस्सा बढ़ सकता है और इससे पूरे क्षेत्र की शांति खतरे में पड़ सकती है।
अल-अक्सा मस्जिद परिसर में क्या हुआ था?
जानकारी के मुताबिक 20 अप्रैल 2026 को करीब 150 इजरायली सेटलर्स इजरायली पुलिस की भारी सुरक्षा के बीच पूर्वी यरूशलम स्थित अल-अक्सा मस्जिद परिसर में दाखिल हुए। ये लोग मुगराबी गेट के रास्ते अंदर गए और वहां कुछ धार्मिक अनुष्ठान किए। इसी दौरान इजरायली पुलिस ने फिलिस्तीनी उपासकों के लिए मस्जिद में प्रवेश पर रोक लगा दी थी।
कुवैत और अन्य देशों की क्या प्रतिक्रिया है?
कुवैत के विदेश मंत्रालय ने इस घटना को धार्मिक स्थलों की सुरक्षा से जुड़े नियमों का उल्लंघन बताया है। इसके अलावा पाकिस्तान, सऊदी अरब, यूएई, जॉर्डन, मिस्र, इंडोनेशिया, तुर्की और कतर के विदेश मंत्रियों ने भी एक संयुक्त बयान जारी किया। इन सभी देशों ने कहा कि मस्जिद और पवित्र चर्चों तक पहुंच को रोकना अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवाधिकारों के खिलाफ है और इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।
संयुक्त राष्ट्र से क्या मांग की गई है?
कुवैत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और खासतौर पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से मांग की है कि ऐसे उल्लंघनों को रोकने के लिए तुरंत कदम उठाए जाएं और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई हो। संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत मिगुएल एंजेल मोराटिनोस ने भी पूजा स्थलों तक पहुंच रोकने पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि इस तरह के एकतरफा कदम अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का उल्लंघन हैं।