आबू धाबी में मुस्लिम काउंसिल ऑफ एल्डर्स ने अल-अक्सा मस्जिद के आहाते में इजरायली पुलिस के संरक्षण में कट्टरपंथियों के घुसने और वहां इजरायली झंडा फहराए जाने की घटना की कड़े शब्दों में निंदा की है। काउंसिल ने इसे एक बेहद भड़काऊ और अस्वीकार्य कार्रवाई बताया है। इस मामले को लेकर काउंसिल ने साफ कर दिया है कि यरुशलम और अल-अक्सा मस्जिद की धार्मिक, ऐतिहासिक और कानूनी स्थिति से किसी भी तरह की छेड़छाड़ को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

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अल-अक्सा मस्जिद पर काउंसिल ने क्या स्पष्ट किया है?

मुस्लिम काउंसिल ऑफ एल्डर्स ने अपने आधिकारिक बयान में यह साफ तौर पर दोहराया है कि अल-अक्सा मस्जिद का पूरा परिसर, जो 144 डोनम के क्षेत्र में फैला हुआ है, पूरी तरह से केवल और केवल मुसलमानों के लिए एक पवित्र इबादतगाह है। इस ऐतिहासिक स्थल की संप्रभुता और पवित्रता को बनाए रखना बेहद जरूरी है और इस संबंध में किसी भी प्रकार का उल्लंघन बर्दाश्त के बाहर है।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय से की गई बड़ी जिम्मेदारी निभाने की मांग

काउंसिल ने इस मामले पर वैश्विक स्तर पर ध्यान आकर्षित करते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है। बयान में कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अपनी नैतिक जिम्मेदारी निभानी चाहिए और यरुशलम के ऐतिहासिक और कानूनी दर्जे को बदलने की कोशिशों को रोकना चाहिए। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर मुस्लिम काउंसिल ऑफ एल्डर्स ने कड़ा रुख अपनाया है और शांति बनाए रखने के लिए अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की आवश्यकता पर बल दिया है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

मुस्लिम काउंसिल ऑफ एल्डर्स ने किस घटना का विरोध किया है?

काउंसिल ने इजरायली पुलिस के संरक्षण में अल-अक्सा मस्जिद परिसर में कट्टरपंथियों के घुसने और वहां इजरायली झंडा फहराए जाने की कार्रवाई का कड़ा विरोध किया है।

काउंसिल के अनुसार अल-अक्सा मस्जिद का क्या दर्जा है?

काउंसिल के अनुसार 144 डोनम के क्षेत्रफल में फैली अल-अक्सा मस्जिद पूरी तरह से केवल मुसलमानों के लिए ही एक पवित्र इबादतगाह है।