बहरीन में अमेजॉन के क्लाउड कंप्यूटिंग ऑपरेशन को ईरानी हमले के बाद नुकसान पहुंचने की खबर सामने आई है। फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमेजॉन वेब सर्विसेज (AWS) के केंद्रों को निशाना बनाया गया है जिससे इंटरनेट सेवाओं पर बड़ा असर पड़ा है। इस हमले के बाद कंपनी ने अपनी सेवाओं में बड़ी गिरावट दर्ज की है और ग्राहकों को अपना डेटा बैकअप लेने की सलाह दी है। यह घटना मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के बीच हुई है जिससे खाड़ी देशों में काम कर रही कई कंपनियों के लिए चिंता पैदा हो गई है।

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अमेजॉन के डेटा सेंटर में क्या नुकसान हुआ है?

अमेजॉन की क्लाउड यूनिट AWS ने पुष्टि की है कि यूएई में उसके दो केंद्रों पर सीधा हमला हुआ है। बहरीन में स्थित एक सुविधा केंद्र के पास ड्रोन गिरने से वहां के बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है। बहरीन के आंतरिक मंत्रालय ने बताया कि नागरिक सुरक्षा बल एक कंपनी के केंद्र में लगी आग को बुझाने में जुटे थे जो हमले की वजह से लगी थी। कंपनी ने इस घटना के बारे में कुछ मुख्य जानकारी साझा की है:

  • हमलों की वजह से इमारतों के स्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचा है।
  • बिजली की सप्लाई बाधित होने से सर्वर और डेटा सेवाओं पर असर पड़ा है।
  • आग बुझाने के दौरान पानी के इस्तेमाल से कुछ मशीनों को नुकसान हुआ है।
  • मिडिल ईस्ट रीजन में सेवाओं की उपलब्धता काफी कम हो गई है।

किन कंपनियों को है खतरा और ग्राहकों के लिए क्या है सलाह?

ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने चेतावनी दी है कि वे मिडिल ईस्ट में काम कर रही अमेरिकी कंपनियों को निशाना बनाना जारी रख सकते हैं। ईरान का आरोप है कि ये कंपनियां खुफिया गतिविधियों में मदद करती हैं। अमेजॉन ने अपने ग्राहकों को सलाह दी है कि वे अपने जरूरी काम को दूसरे क्षेत्रों के डेटा सेंटर्स पर शिफ्ट कर लें। मार्च के महीने में हुए इन हमलों और रुकावटों को देखते हुए अमेजॉन ने बहरीन और यूएई के केंद्रों का इस्तेमाल करने वालों के लिए एक महीने का बिल माफ करने का फैसला किया है।

महत्वपूर्ण तारीख घटना का विवरण
1 मार्च 2026 यूएई और बहरीन में पहला ड्रोन हमला हुआ
24 मार्च 2026 बहरीन में सेवाओं में फिर से बड़ी रुकावट आई
31 मार्च 2026 ईरान ने अमेरिकी टेक कंपनियों को चेतावनी दी
1 अप्रैल 2026 फाइनेंशियल टाइम्स ने नुकसान की विस्तृत रिपोर्ट दी

ईरान की ओर से जारी बयान में माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, एप्पल, मेटा और सिस्को जैसी बड़ी कंपनियों को भी भविष्य के संभावित लक्ष्यों की सूची में शामिल किया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि युद्ध के दौरान किसी देश द्वारा कमर्शियल डेटा केंद्रों को इस तरह निशाना बनाने का यह पहला मामला है। फिलहाल बहरीन और यूएई में इंटरनेट और क्लाउड आधारित काम करने वाले प्रवासियों और स्थानीय व्यापारियों को अपनी सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए कहा गया है।