अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रहे तनाव को खत्म करने की दिशा में एक बहुत बड़ी खबर सामने आई है। दोनों देशों के सीनियर अधिकारियों के बीच एक नए समझौते के ड्राफ्ट पर सहमति बन गई है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने बताया कि यह 14 शर्तों वाला एक समझौता ढांचा यानी फ्रेमवर्क एग्रीमेंट है, जिसका मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच युद्ध जैसी स्थिति को समाप्त करना है। इस बातचीत को सफल बनाने में पाकिस्तान और कतर जैसे देशों ने अहम मध्यस्थ की भूमिका निभाई है।

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ईरान और अमेरिका के बीच समझौते में क्या है खास?

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baqaei ने जानकारी दी है कि यह 14 क्लॉज का एक समझौता है। इसके आधार पर अगले 30 से 60 दिनों के भीतर एक फाइनल एग्रीमेंट तैयार होने की उम्मीद है। इस बातचीत और समझौते के मुख्य पहलू इस प्रकार हैं:

  • परमाणु मुद्दा शामिल नहीं: इस शुरुआती समझौते में परमाणु कार्यक्रम को शामिल नहीं किया गया है, इस पर बाद में अलग से चर्चा की जाएगी।
  • युद्ध की समाप्ति: ईरान का मुख्य ध्यान लेबनान सहित सभी मोर्चों पर युद्ध को समाप्त करने पर है।
  • Strait of Hormuz का मुद्दा: ईरान चाहता है कि इस क्षेत्र से अमेरिकी नाकेबंदी हटे, हालांकि वह इसे अपने और खाड़ी देशों के बीच का आपसी मामला मानता है।
  • सीजफायर विस्तार: दोनों देश वर्तमान में लागू संघर्ष विराम को 60 दिनों के लिए आगे बढ़ाने के बेहद करीब हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और अधिकारियों का क्या है रुख?

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने इस बात की पुष्टि की है कि दोनों पक्ष समझौते के बहुत करीब पहुंच चुके हैं और उन्होंने इस ड्राफ्ट की समीक्षा की है। ट्रंप ने स्पष्ट रूप से कहा है कि वह केवल उसी समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे जिसमें अमेरिका की सभी मांगें पूरी होंगी। अमेरिका की प्रमुख शर्तें निम्नलिखित हैं:

  • ईरान के पास किसी भी प्रकार का परमाणु हथियार नहीं होना चाहिए।
  • ईरान को अपना अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम (highly enriched uranium) सौंपना होगा।
  • Strait of Hormuz को बिना किसी टैक्स या टोल के अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए खुला रखना होगा।

अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने भी बातचीत में प्रगति की बात स्वीकार की है और आने वाले दिनों में किसी बड़ी घोषणा की उम्मीद जताई है।

पाकिस्तान और कतर ने निभाई मध्यस्थ की बड़ी भूमिका

इस बातचीत को इस स्तर तक पहुंचाने में पाकिस्तान के सेना प्रमुख Field Marshal Asim Munir ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने ईरान का दौरा कर बातचीत को आगे बढ़ाया। कतर ने भी अपने वरिष्ठ अधिकारियों को तेहरान भेजकर इस मध्यस्थता प्रक्रिया का पूरा समर्थन किया। दूसरी तरफ, ईरान के संसद अध्यक्ष Mohammad Bagher Qalibaf ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि यदि उन्होंने फिर से युद्ध शुरू करने का प्रयास किया, तो ईरान की सेना इसका बहुत कड़ा जवाब देगी।

Frequently Asked Questions (FAQs)

क्या इस नए समझौते में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर सहमति बन गई है?

नहीं, ईरान के विदेश मंत्रालय के अनुसार परमाणु मुद्दे को इस 14 सूत्रीय समझौते से बाहर रखा गया है और इस विषय पर बाद में अलग से बातचीत की जाएगी।

इस समझौते को पूरा होने में कितना समय लग सकता है?

ईरान के अधिकारियों के अनुसार, इस फ्रेमवर्क ड्राफ्ट पर सहमति बनने के बाद फाइनल समझौते तक पहुंचने में लगभग 30 से 60 दिनों का समय लग सकता है।