अमेरिका और चीन के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। अमेरिकी खजाना सचिव Scott Bessent ने आरोप लगाया है कि चीन ईरान से ऊर्जा संसाधन खरीदकर उसकी मिलिट्री को पैसा दे रहा है। इस विवाद को लेकर अमेरिका ने कई कड़े कदम उठाए हैं, जबकि चीन ने साफ कह दिया है कि वह अमेरिकी प्रतिबंधों को कतई नहीं मानेगा।

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अमेरिका ने चीन पर क्या आरोप लगाए और क्या एक्शन लिया?

अमेरिकी खजाना सचिव Scott Bessent के मुताबिक, चीन ईरान के तेल और ऊर्जा संसाधनों को खरीदकर उसकी आर्थिक मदद कर रहा है। अमेरिका ने इसे रोकने के लिए Operation Economic Fury नाम का अभियान शुरू किया है। इस अभियान के तहत अमेरिका ने ईरान के विदेशी मुद्रा विनिमय केंद्रों (Foreign Currency Exchange Houses) पर प्रतिबंध लगाए हैं।

  • 24 अप्रैल 2026: अमेरिका ने चीन की दूसरी सबसे बड़ी ‘टीपॉट’ रिफाइनरी को ब्लैकलिस्ट कर दिया।
  • आरोप: इस रिफाइनरी के जरिए ईरान की मिलिट्री को करोड़ों डॉलर का फायदा पहुँचाया गया।
  • चेतावनी: सचिव Bessent ने चीनी बैंकों को पत्र भेजकर चेतावनी दी है कि ईरान से जुड़े लेन-देन करने पर उन पर भी प्रतिबंध लग सकते हैं।

चीन का जवाब और ईरान की क्या है प्रतिक्रिया?

अमेरिका की इन कार्रवाइयों पर चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने 3 मई 2026 को एक ‘निषेध आदेश’ (Prohibition Order) जारी किया। चीन ने साफ कर दिया है कि वह पांच चीनी रिफाइनरियों पर लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंधों को मान्यता नहीं देगा और न ही उन्हें लागू करेगा। चीन का कहना है कि ऐसे एकतरफा प्रतिबंध अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ हैं।

दूसरी तरफ, ईरान की IRGC ने एक बयान जारी किया है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump को या तो सैन्य अभियान चुनना होगा या फिर ईरान के साथ किसी समझौते पर बात करनी होगी। फिलहाल राष्ट्रपति Trump तेहरान से मिले एक नए शांति प्रस्ताव को देख रहे हैं, लेकिन वे अभी भी ईरान पर पूरी तरह भरोसा नहीं कर रहे हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में क्या स्थिति है?

ईरान के तेल निर्यात को पूरी तरह रोकने के लिए अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य में नौसैनिक नाकेबंदी (Naval Blockade) कर रखी है। Scott Bessent का कहना है कि इस नाकेबंदी की वजह से चीन अब ईरान से तेल नहीं ले पाएगा। इस पूरे मामले ने दुनिया के तीन बड़े देशों के बीच टकराव को और बढ़ा दिया है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

अमेरिका ने चीन की रिफाइनरियों पर प्रतिबंध क्यों लगाए?

अमेरिका का आरोप है कि चीन की रिफाइनरियां ईरान से कच्चा तेल खरीदकर उसकी सेना को करोड़ों डॉलर का फंड मुहैया करा रही हैं।

चीन ने अमेरिकी प्रतिबंधों पर क्या प्रतिक्रिया दी है?

चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने कहा है कि वह अमेरिकी प्रतिबंधों को नहीं मानेगा और उन्हें लागू नहीं करेगा क्योंकि ये अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन हैं।