अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अपनी समुद्री नाकाबंदी को और बढ़ा दिया है। 16 अप्रैल 2026 को दिए गए अपडेट के मुताबिक, अब अमेरिकी नौसेना किसी भी ऐसे जहाज को रोक सकती है और उसकी तलाशी ले सकती है जिसका संबंध ईरान से हो। यह बड़ा फैसला तब लिया गया है जब इस्लामाबाद में दोनों देशों के बीच हुई शांति वार्ता बिना किसी समझौते के खत्म हो गई।

अमेरिका ने नाकाबंदी में क्या बदलाव किए हैं?

अमेरिकी नौसेना अब उन सभी जहाजों को पकड़ सकती है जो ईरान के लिए प्रतिबंधित सामान ले जा रहे हों। अब नियम यह है कि सिर्फ उन जहाजों को नहीं रोका जाएगा जो ईरान के पोर्ट पर जा रहे हैं, बल्कि ईरान के झंडे वाले किसी भी जहाज या उन जहाजों की तलाशी ली जा सकती है जिन पर प्रतिबंध लगा है। यह कार्रवाई मुख्य रूप से अरब सागर में की जाएगी ताकि अमेरिकी जहाजों को ईरान के तटों से सुरक्षित दूरी पर रखा जा सके।

विवरण जानकारी
नाकाबंदी शुरू होने की तारीख 13 अप्रैल 2026
विस्तार की तारीख 16 अप्रैल 2026
प्रतिबंधित सामान हथियार, परमाणु पुर्जे, तेल, लोहा, स्टील और एल्युमीनियम
शिपिंग पर असर हॉर्मुज जलडमरूमध्य के ट्रैफिक में 85% की गिरावट
मुख्य कार्रवाई क्षेत्र अरब सागर
अमेरिकी नेतृत्व राष्ट्रपति ट्रंप और रक्षा सचिव पीट हेगसेथ

ईरान की क्या प्रतिक्रिया है और खतरा क्या है?

ईरान ने अमेरिका के इस कदम को ‘राजकीय समुद्री डकैती’ करार दिया है। ईरान के सैन्य कमांड सेंटर के प्रमुख अली अब्दुल्लाही ने चेतावनी दी कि अगर यह नाकाबंदी जारी रही, तो यह युद्ध की शुरुआत हो सकती है। ईरान ने धमकी दी है कि उसकी सेना फारस की खाड़ी, ओमान की खाड़ी और लाल सागर में होने वाले सभी आयात और निर्यात को रोक देगी।

सऊदी अरब और अन्य देशों पर क्या असर पड़ेगा?

सऊदी अरब ने अमेरिका से इस नाकाबंदी को हटाने और बातचीत फिर से शुरू करने की अपील की है। सऊदी को डर है कि इस तनाव की वजह से यमन के हूती विद्रोही बाब अल-मंडब जलडमरूमध्य को बंद कर सकते हैं, जिससे पूरे क्षेत्र का व्यापार ठप हो जाएगा। वहीं चीन ने भी अमेरिका के इस फैसले को खतरनाक और गैर-जिम्मेदाराना बताया है और शांति की अपील की है।

Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.