अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत से आने वाले कई उत्पादों पर 25% आयात शुल्क (टैरिफ) लगाने का ऐलान किया है। इससे भारत के लगभग 10% निर्यात पर सीधा असर पड़ेगा। 2024 में भारत-अमेरिका व्यापार $129.2 बिलियन तक पहुंच गया था, जो भारत के लिए अमेरिका को एक अहम व्यापारिक साझेदार बनाता है।

किन सेक्टर्स को सबसे ज्यादा झटका लगेगा?

1. हीरे-जेवरात (Gems & Jewellery):

  • अमेरिका भारत के गहनों का सबसे बड़ा खरीदार है — हर साल $10 बिलियन से ज़्यादा।

  • 25% शुल्क से कीमतें बढ़ेंगी, शिपमेंट में देरी होगी।

  • इसका असर छोटे कारीगरों से लेकर बड़े एक्सपोर्टर्स तक सभी पर पड़ेगा।

  • नौकरियाँ जा सकती हैं, और प्रतिस्पर्धा कमज़ोर होगी।

 2. दवाइयां (Generic Pharma):

  • अमेरिका में 40% जेनेरिक दवाएं भारत से जाती हैं (लगभग $8 बिलियन का व्यापार)।

  • अगर 10-25% टैरिफ लगा, तो अमेरिकी मरीज़ों को दवाएँ महंगी पड़ेंगी।

  • हेल्थकेयर सिस्टम पर दबाव बढ़ेगा, और सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है।

 3. कपड़ा और परिधान (Textiles & Apparel):

  • वॉलमार्ट, गैप जैसे अमेरिकी रिटेल ब्रांड्स भारत से भारी मात्रा में कपड़े मंगवाते हैं।

  • टैरिफ से ऑर्डर घट सकते हैं, मुनाफा कम होगा और एक्सपोर्टर्स को भारी नुकसान होगा।

  • पहले ही वियतनाम जैसे देशों से मुकाबले में भारत पिछड़ रहा था।

4. इलेक्ट्रॉनिक्स (Smartphones & iPhones):

  • भारत से iPhone का निर्यात हाल ही में शुरू हुआ था।

  • भले ही अभी टैरिफ लागू नहीं हुआ है, भविष्य में बदलाव हो सकते हैं।

  • Apple जैसी कंपनियों को सप्लाई चेन फिर से प्लान करनी पड़ सकती है।

 5. तेल रिफाइनरियां (Oil Refiners):

  • भारत रूस से 37% तेल सस्ते में लेता है।

  • ट्रंप की रूस-नीति के चलते अब अमेरिकी दबाव बढ़ सकता है।

  • अगर रूसी तेल पर रोक लगी तो भारत की बड़ी तेल कंपनियों को घाटा होगा।

 व्यापक असर: क्या हो सकता है आगे?

  • भारत के कुल निर्यात का 20% अमेरिका को जाता है, जो GDP का लगभग 2.5% है।

  • टेक्सटाइल, दवाएं, ऑटो पार्ट्स, टाइल्स जैसे सेक्टरों को झटका लग सकता है।

  • मिड-कैप कंपनियों और शेयर बाज़ार में गिरावट का डर है।

  • आईटी सेक्टर को सीधे असर नहीं है, लेकिन ग्लोबल अनिश्चितता से निवेश कम हो सकता है।

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की छठी बैठक अगस्त के अंत में होनी है। उम्मीद है कि उसमें कुछ राहत या स्पष्टता मिल सकती है। फिलहाल, भारतीय एक्सपोर्टर्स के लिए यह तिमाही मुश्किल साबित हो सकती है।

Vandana Upadhyay

4 वर्ष तक देश के बड़े अखबारी प्रकाशनो में काम करने के उपरांत मैं अब GulfHindi में अपनी सेवा दे रही हूँ। उम्मीद हैं मेरी लेखनी आप सब को खबरों से सही और सटीक रूबरू कराएगी.