अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव को खत्म करने के लिए एक बड़ी कोशिश हो रही है। अमेरिका ने पाकिस्तान के जरिए ईरान को एक नया समझौता प्रस्ताव भेजा है। ईरान ने इस प्रस्ताव को मिलने की बात स्वीकार की है और अब उसकी बारीकी से जांच की जा रही है। इस पूरी प्रक्रिया में पाकिस्तान एक मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है।

अमेरिका के प्रस्ताव में क्या है और ईरान का क्या कहना है?

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baghaei ने पुष्टि की है कि उन्हें अमेरिका के “दृष्टिकोण” मिल चुके हैं और उन पर विचार किया जा रहा है। यह बातचीत ईरान द्वारा दिए गए 14 सूत्रीय प्रस्ताव पर आधारित है। बताया जा रहा है कि नए प्रस्ताव में ईरान की जमी हुई संपत्ति और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से जुड़े कुछ बेहतर प्रोत्साहन दिए गए हैं। हालांकि, ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका ने कोई नई रियायत नहीं दी है।

Pakistan की भूमिका और Donald Trump का रुख

इस पूरे मामले में पाकिस्तान बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। पाकिस्तान के गृह मंत्री Mohsin Naqvi ने संदेशों का आदान-प्रदान करने के लिए एक हफ्ते के भीतर दो बार तेहरान का दौरा किया। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने बताया कि बातचीत अपने अंतिम चरण में है लेकिन उन्होंने यह भी साफ किया कि वह इसे जल्दबाजी में पूरा नहीं करना चाहते। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समझौता नहीं हुआ तो इसके परिणाम बुरे हो सकते हैं।

डील में सबसे बड़ी रुकावट क्या है?

  • परमाणु कार्यक्रम: अमेरिका चाहता है कि किसी भी स्थायी युद्धविराम से पहले परमाणु मुद्दे को सुलझा लिया जाए।
  • ईरान की मांग: ईरान चाहता है कि पहले एक स्थायी युद्धविराम हो और उसके बाद परमाणु कार्यक्रम पर अलग से बातचीत की जाए।
  • क्षेत्रीय प्रभाव: सऊदी अरब ने अमेरिका की इन कोशिशों का स्वागत किया है ताकि क्षेत्र में स्थिरता वापस आ सके।

Frequently Asked Questions (FAQs)

अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ कौन है

इस बातचीत में Pakistan मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। पाकिस्तान के गृह मंत्री Mohsin Naqvi और वहां के सैन्य प्रमुख इस समझौते को अंतिम रूप देने में मदद कर रहे हैं।

समझौते में मुख्य विवाद किस बात पर है

मुख्य विवाद परमाणु कार्यक्रम को लेकर है। अमेरिका परमाणु मुद्दे का पहले समाधान चाहता है जबकि ईरान पहले युद्धविराम की मांग कर रहा है।