अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के बीच एक बड़ी खबर आई है। दोनों देशों के बीच ईरान के फ्रीज किए गए अरबों डॉलर के पैसों को छोड़ने के लिए एक समझौता होने की उम्मीद है। हालांकि, इस डील के साथ कई शर्तें जुड़ी हैं और इसमें Gulf देशों के नुकसान की भरपाई का मुद्दा भी शामिल है।

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पैसे को लेकर क्या है पूरा मामला

ईरान चाहता है कि उसके फ्रीज किए गए पैसों में से 6 से 12 अरब डॉलर उसे तुरंत वापस मिल जाएं। दूसरी तरफ अमेरिका का कहना है कि वह पैसा एक साथ नहीं देगा। अमेरिका चाहता है कि यह पैसा किस्तों में मिले और इसका इस्तेमाल सिर्फ मानवीय सामान खरीदने के लिए हो। अमेरिका इस बात के खिलाफ है कि सारा पैसा सीधे ईरान को वापस मिल जाए।

डील की मुख्य शर्तें और नियम

इस अंतरिम समझौते के तहत कुछ जरूरी शर्तें रखी गई हैं ताकि इलाके में शांति बनी रहे।

  • ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर अपना कंट्रोल कम करना होगा।
  • अमेरिका ईरान के बंदरगाहों की नाकाबंदी खत्म करेगा।
  • परमाणु हथियारों और यूरेनियम के स्टॉक जैसे बड़े मुद्दों पर बातचीत बाद में होगी।
  • कतर (Qatar) इस पूरी बातचीत में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है।

Gulf देशों को क्या मिलेगा

अमेरिकी ट्रेजरी सचिव Scott Bessent ने 11 जून 2026 को साफ तौर पर कहा कि अगर ईरान ने Gulf देशों को कोई नुकसान पहुँचाया है, तो उसकी भरपाई ईरान के इन्हीं फ्रीज खातों से की जाएगी। इसके अलावा, ईरान के ‘पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी’ द्वारा वसूले गए टोल टैक्स को भी इन खातों से काट लिया जाएगा। अमेरिका ने लगभग 24 अरब डॉलर के फंड्स को इस काम के लिए इस्तेमाल करने के कानूनी तरीके खोजने के आदेश दिए हैं।

पैसों और समय का पूरा हिसाब

विवरण राशि या समय
ईरान की तत्काल मांग 6 से 12 अरब डॉलर
कुल फ्रीज फंड्स (वैश्विक) लगभग 100 अरब डॉलर
अमेरिका के पास मौजूद फंड्स लगभग 2 अरब डॉलर
नुकसान भरपाई के लिए प्रस्तावित राशि 24 अरब डॉलर
भुगतान की समय सीमा 60 दिन
ईरान की शुरुआती शर्त कुल राशि का 50% तुरंत

मिलिट्री तनाव और चेतावनी

बातचीत के साथ-साथ जमीन पर हालात तनावपूर्ण रहे। 11 जून 2026 को अमेरिका और ईरान के बीच हवाई हमले हुए। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर तुरंत समझौता नहीं हुआ तो और हमले होंगे। वहीं ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने कहा कि युद्ध ईरान के हित में नहीं है और यह एक बंद रास्ता है।