अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा युद्ध अब खत्म हो सकता है। दोनों देशों ने शांति के लिए ‘इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग’ (MoU) पर सहमति जताई है। अब खबर है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन इस समझौते पर दूर बैठे ही यानी रिमोटली साइन कर सकते हैं।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाएई ने बताया कि तेहरान इस बात पर विचार कर रहा है कि दोनों देशों के राष्ट्रपति इस दस्तावेज़ पर रिमोटली हस्ताक्षर करें। यह कदम बहुत बड़ा माना जा रहा है क्योंकि 1980 के बाद से दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध पूरी तरह टूट चुके थे।
इस समझौते को लेकर पहले ही काफी काम हो चुका है। 14 जून 2026 को अमेरिका और ईरान ने इसे डिजिटल तरीके से साइन किया था, जिसकी पुष्टि अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने की थी। हालांकि, एक औपचारिक साइनिंग प्रोग्राम शुक्रवार, 19 जून 2026 को स्विट्जरलैंड के बर्गनस्टॉक रिसॉर्ट में रखा गया है।
समझौते की मुख्य बातें
अमेरिकी अधिकारियों ने इस MoU के 14 पॉइंट्स जारी किए हैं, जिसमें युद्ध रोकने और व्यापार को दोबारा शुरू करने की बात कही गई है। मुख्य शर्तें नीचे दी गई हैं:
| मुख्य बिंदु | विवरण |
|---|---|
| सैन्य ऑपरेशन | लेबनान समेत सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई तुरंत और हमेशा के लिए बंद होगी। |
| होर्मुज़ जलडमरूमध्य | कमर्शियल शिपिंग के लिए इसे दोबारा खोला जाएगा, लेकिन नियंत्रण ईरान के पास रहेगा। |
| अमेरिकी नाकाबंदी | ईरानी बंदरगाहों पर लगी अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी खत्म की जाएगी। |
| आर्थिक मदद | ईरान के पुनर्निर्माण और विकास के लिए 300 अरब डॉलर का फंड दिया जाएगा। |
| संपत्ति और प्रतिबंध | ईरान की जमी हुई संपत्ति वापस मिलेगी और प्रतिबंधों में राहत दी जाएगी। |
| परमाणु मुद्दा | परमाणु कार्यक्रम और यूरेनियम के स्टॉक पर बातचीत 60 दिन के बाद होगी। |
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने कहा कि यह समझौता युद्ध रोकने और बातचीत शुरू करने के लिए एक ज़रूरी कदम है। उन्होंने यह भी बताया कि ईरानी संसद ने इस टेक्स्ट को मंजूरी दे दी है। विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने साफ किया कि समझौते के कुछ नियम लागू हो चुके हैं और बाकी 19 जून के औपचारिक हस्ताक्षर के बाद लागू होंगे।
इस पूरे शांति प्रयास में पाकिस्तान ने मुख्य मध्यस्थ के तौर पर काम किया है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ के साथ-साथ कतर, सऊदी अरब और तुर्की ने भी बातचीत को सफल बनाने में मदद की है।