अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अब युद्ध की कगार पर पहुँच गया है. अमेरिका ने ईरान के समुद्री इलाकों और बंदरगाहों पर जोरदार हमले किए हैं, जिसके बाद ईरान ने भी पलटवार करते हुए खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया है. इस टकराव के कारण पूरे इलाके में सुरक्षा का खतरा बढ़ गया है.
अमेरिका के हमलों में भारी नुकसान
ईरान ने लंदन में अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) की बैठक में अमेरिका पर सैन्य हमले का आरोप लगाया. ईरान के मुताबिक, 8 और 9 जुलाई को अमेरिका ने उसके बंदरगाहों और समुद्री बुनियादी ढांचे पर हमले किए. इन हमलों में चाबहार पोर्ट का ट्रैफिक कंट्रोल टावर, मछुआरों की नावें और नेविगेशन उपकरण तबाह हो गए. ईरान ने बताया कि इन हमलों में 5 प्रांतों में 14 लोगों की जान गई और 78 लोग घायल हुए. बसहर शहर के एक अधिकारी ने दावा किया कि अमेरिका ने बसहर परमाणु संयंत्र के पास भी हमला किया.
अमेरिका का जवाब और कार्रवाई
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने 9 जुलाई को ऐलान किया कि ईरान के साथ सीजफायर अब खत्म हो चुका है. उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई ईरान द्वारा जहाजों पर किए गए पिछले हमलों का बदला है. US Central Command (CENTCOM) ने पुष्टि की कि उन्होंने लगातार दो दिनों तक ईरान के करीब 90 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया. इनमें एयर डिफेंस सिस्टम और तटीय निगरानी केंद्र शामिल थे ताकि ईरान की जहाजों पर हमला करने की क्षमता को कम किया जा सके. उपराष्ट्रपति JD Vance ने सख्त लहजे में कहा कि अगर ईरान ने जहाजों पर गोली चलाई तो अमेरिका उन्हें करारा जवाब देगा.
ईरान की चेतावनी और जवाबी हमला
ईरान के संसद स्पीकर Mohammad Bagher Ghalibaf ने चेतावनी दी कि अमेरिका को अपनी गुंडागर्दी की कीमत चुकानी होगी. IRGC Navy ने साफ किया है कि अगर अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के शिपिंग रूट में दखल दिया, तो ईरान इसका जोरदार जवाब देगा, जिससे समुद्री रास्ता बंद हो सकता है. इसी बीच, ईरान ने कुवैत, बहरीन और कतर में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए. हालांकि, इन तीनों देशों ने बताया कि उन्होंने आने वाली मिसाइलों और ड्रोन को हवा में ही रोक लिया.
