अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के साथ एक शांति समझौता (MOU) किया है. इस फैसले के बाद दुनिया भर में हलचल मच गई है. जहां ट्रंप इसे आर्थिक रूप से बड़ी जीत बता रहे हैं, वहीं इजरायल और अमेरिका के कुछ खास गुट इस डील से काफी नाराज हैं. अब सबकी नजरें इस बात पर हैं कि क्या यह समझौता टिका रहेगा या इसे बीच में ही रोक दिया जाएगा.

🗞️: Abu Dhabi Rent Freeze: अबू धाबी में अब नहीं बढ़ेगा किराया, सरकार ने लगाया फ्रीज़, किरायेदारों और प्रवासियों को मिली बड़ी राहत

क्या है यह शांति समझौता

यह समझौता 17 जून 2026 को फ्रांस के Versailles में एक डिनर के दौरान साइन किया गया. यह कोई अंतिम समझौता नहीं है, बल्कि 14 पॉइंट वाला एक ढांचा है. इसके तहत अगले 60 दिनों तक बातचीत होगी ताकि एक पूरा सेटलमेंट निकाला जा सके. इस डील की मुख्य बातें नीचे दी गई हैं:

  • सैन्य कार्रवाई पर रोक: लेबनान समेत सभी मोर्चों पर सैन्य ऑपरेशन्स को तुरंत और हमेशा के लिए बंद करना होगा.
  • समुद्री रास्ता: Strait of Hormuz की अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी हटा ली जाएगी और रास्ता फिर से खोला जाएगा.
  • तेल और पैसा: ईरान के तेल निर्यात के लिए अमेरिका छूट देगा और ईरान के अरबों डॉलर के जमे हुए फंड को रिलीज किया जा सकता है.
  • परमाणु कार्यक्रम: ईरान ने वादा किया है कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा. International Atomic Energy Agency (IAEA) इस पर नजर रखेगी.

ट्रंप और अमेरिका का पक्ष

President Trump ने सोशल मीडिया पर इस डील की तारीफ की और कहा कि इससे तेल की सप्लाई बढ़ेगी और कीमतें गिरेंगी. उन्होंने इस समझौते का विरोध करने वालों को ‘मूर्ख’ बताया. ट्रंप ने यह भी कहा कि इजरायल के नेताओं को इस डील से खुश होना चाहिए क्योंकि उनका सबसे बड़ा डर परमाणु हथियार था, जो अब खत्म हो गया. वहीं, उपराष्ट्रपति JD Vance ने इजरायल को चेतावनी दी कि वे इस शांति प्रक्रिया में बाधा न डालें.

इजरायल की नाराजगी

इस समझौते से इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu काफी नाराज हैं. उन्होंने साफ कर दिया है कि इजरायल लेबनान से अपनी सेना नहीं हटाएगा. इजरायल के रक्षा मंत्री Israel Katz ने भी कहा कि वे लेबनान से पीछे नहीं हटेंगे और अगर ईरान ने हमला किया तो उसका करारा जवाब दिया जाएगा. वहीं, वित्त मंत्री Bezalel Smotrich ने इस डील को इजरायल और पूरी दुनिया के लिए नुकसानदेह बताया है.

अमेरिकी गुटों और विशेषज्ञों की राय

अमेरिका में मौजूद pro-Israel गुट जैसे AIPAC और ZOA इस डील की आलोचना कर रहे हैं. उन्हें डर है कि इससे ईरान और ज्यादा ताकतवर हो जाएगा. विशेष रूप से ईरान के पुनर्निर्माण के लिए 300 अरब डॉलर के फंड की बात पर अमेरिका में विवाद छिड़ गया है. कई विश्लेषकों का कहना है कि यह डील इजरायल के लिए एक बड़ा झटका है. हालांकि, कुछ का मानना है कि बड़े युद्ध से बचने के लिए यह एक ठीक विकल्प है.

IAEA ने 19 जून 2026 को बयान दिया कि वह इस डील को लागू करने के लिए जरूरी कदम उठाने को तैयार है.

Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.