अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। Axios की एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका की Central Command (CENTCOM) ने ईरान पर ‘शॉर्ट और स्ट्रॉन्ग’ यानी छोटे लेकिन जोरदार हमलों का प्लान तैयार कर लिया है। पूरी दुनिया की नजरें अब इस बात पर हैं कि क्या अमेरिका वास्तव में हमला करेगा या बातचीत से रास्ता निकलेगा।
अमेरिका की हमले की तैयारी और सरकारी बयान
Axios की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की पूरी योजना बना ली है। अमेरिका के Department of War के अधिकारियों ने यह बात कन्फर्म की है कि राष्ट्रपति के पास सभी विकल्प खुले हैं और वे जरूरत पड़ने पर कोई भी कदम उठा सकते हैं। हालांकि सुरक्षा कारणों से भविष्य की चालों और सैन्य हलचल के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी गई है। दूसरी तरफ ईरान के अधिकारियों ने भी कहा है कि वे किसी भी हमले का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
ट्रम्प की रणनीति और ईरान का प्रस्ताव
राष्ट्रपति Donald Trump ने Axios को दिए इंटरव्यू में कहा कि ईरान के खिलाफ अभी चल रही समुद्री नाकाबंदी (naval blockade) बमबारी से ज्यादा असरदार है। उन्होंने साफ किया कि जब तक ईरान परमाणु कार्यक्रम पर अमेरिका की शर्तों को नहीं मानता, यह नाकाबंदी जारी रहेगी। उन्होंने यह भी बताया कि 28 अप्रैल की शाम तक उन्होंने किसी सीधी सैन्य कार्रवाई का आदेश नहीं दिया था। इसी बीच ईरान ने Strait of Hormuz को खोलने और विवाद खत्म करने का एक नया प्रस्ताव अमेरिका को भेजा था, जिसमें परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत को टालने की बात कही गई थी, लेकिन राष्ट्रपति ट्रम्प ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया।
सऊदी अरब और पाकिस्तान की भूमिका
- सऊदी अरब: रिपोर्ट्स के मुताबिक सऊदी क्राउन प्रिंस Mohammed bin Salman अमेरिका को सैन्य कार्रवाई के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं ताकि क्षेत्रीय ताकत का संतुलन बदला जा सके।
- पाकिस्तान: पाकिस्तान इस पूरे विवाद में एक मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है और अमेरिका व ईरान के बीच बातचीत कराने की कोशिश कर रहा है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
क्या अमेरिका ने ईरान पर हमला कर दिया है?
नहीं, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पुष्टि की है कि 28 अप्रैल तक उन्होंने किसी सीधी सैन्य कार्रवाई का आदेश नहीं दिया था, हालांकि CENTCOM ने हमले का प्लान तैयार रखा है।
ईरान ने विवाद सुलझाने के लिए क्या प्रस्ताव दिया था?
ईरान ने Strait of Hormuz को फिर से खोलने और संघर्ष खत्म करने का प्रस्ताव दिया था, जिसमें परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा को आगे बढ़ाने की बात थी, जिसे अमेरिका ने ठुकरा दिया।