अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बहुत बढ़ गया है। राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान पर एक बहुत बड़े हमले का प्लान बनाया था जो 19 मई को होना था। लेकिन आखिरी समय पर इस हमले को रोक दिया गया है। अब दुनिया की नज़रें अगले हफ्ते पर हैं कि क्या कोई समझौता होता है या युद्ध शुरू होता है।
हमले को रोकने की वजह और ट्रंप की शर्त क्या है?
President Trump ने बताया कि Saudi Arabia, Qatar और UAE के नेताओं के अनुरोध पर उन्होंने हमले को रोका है। फिलहाल दोनों देशों के बीच गंभीर बातचीत चल रही है। ट्रंप ने साफ़ किया कि यह हमला रोकने का फैसला सिर्फ बातचीत के लिए है। उन्होंने शर्त रखी है कि ईरान के पास कोई परमाणु हथियार (Nuclear Weapons) नहीं होने चाहिए।
ट्रंप ने पेंटागन के अधिकारियों को आदेश दिया है कि वे किसी भी समय बड़े हमले के लिए तैयार रहें। अगर बातचीत सफल नहीं हुई तो अगले हफ्ते यानी शुक्रवार, शनिवार या रविवार तक कार्रवाई हो सकती है। Vice President JD Vance ने भी कहा कि अमेरिका पूरी तरह तैयार है और वह ऐसा कोई समझौता नहीं करेगा जिसमें ईरान को परमाणु हथियार बनाने की छूट मिले।
ईरान की प्रतिक्रिया और खाड़ी देशों में क्या स्थिति है?
ईरान ने अमेरिका के इस फैसले का मज़ाक उड़ाया है और इसे एक धोखा बताया है। ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने अपनी सेना को निर्देश दिए हैं कि वे खतरों को खत्म करने के लिए पहले ही हमला (Pre-emptive action) करने को तैयार रहें। ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने कहा कि वे सीधे तौर पर अमेरिका से बात नहीं कर रहे हैं बल्कि ओमान जैसे देशों के ज़रिए बातचीत हो रही है।
इसी बीच खाड़ी देशों में हलचल बढ़ गई है। UAE ने पिछले 48 घंटों में 6 ड्रोन रोके हैं और एक ड्रोन हमला Barakah nuclear facility के जनरेटर पर हुआ है। उधर अमेरिका ने हिंद महासागर में ईरान से जुड़ा एक तेल टैंकर Skywave ज़ब्त कर लिया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक अब तक इस संघर्ष में अमेरिका के 42 विमान नष्ट या खराब हो चुके हैं।
Frequently Asked Questions (FAQs)
क्या अमेरिका ईरान पर हमला करेगा?
राष्ट्रपति Trump ने 19 मई का हमला रोक दिया है। अब अगले हफ्ते तक बातचीत होगी, अगर कोई समझौता नहीं हुआ तो अमेरिका बड़ा हमला कर सकता है।
UAE में ड्रोन हमलों का क्या असर हुआ है?
UAE ने 6 ड्रोन इंटरसेप्ट किए हैं और एक ड्रोन हमला Barakah nuclear facility के जनरेटर पर हुआ है, जिसके पीछे इराक का हाथ बताया जा रहा है।
