अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव अब एक खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। नेशनल ईरानियन अमेरिकन काउंसिल (NIAC) ने चेतावनी दी है कि ईरान के खिलाफ युद्ध को बढ़ावा देना नैतिक, रणनीतिक और राजनीतिक रूप से पूरी तरह गलत होगा। अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, इस समय दोनों देशों के बीच बातचीत के साथ-साथ तनाव भी चरम पर है और मध्यस्थ देश शांति स्थापित करने की कोशिश में जुटे हैं।
अमेरिका और ईरान का इस मुद्दे पर क्या रुख है?
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने हाल ही में कहा है कि ईरान के साथ बातचीत में कुछ प्रगति हुई है, लेकिन सैन्य विकल्प अभी भी खत्म नहीं हुआ है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी ईरान को समझौता करने के लिए केवल दो से तीन दिन का समय दिया है। दूसरी ओर, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक्छी ने साफ किया है कि बातचीत करने का मतलब आत्मसमर्पण करना नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका ने फिर से हमला किया तो उसे और भी बड़े झटके झेलने पड़ सकते हैं। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने भी कहा कि उनका देश सम्मान के साथ शांति वार्ता में शामिल हो रहा है।
शांति समझौते और परमाणु संयंत्र पर मंडराता खतरा
इस पूरे विवाद में कतर, पाकिस्तान, तुर्की, सऊदी अरब और जॉर्डन जैसे देश दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, यूएई के बराक परमाणु संयंत्र पर हुए ड्रोन हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता काफी बढ़ गई है। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने भी परमाणु संयंत्रों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई है। वहीं, अमेरिकी सीनेट ने एक वार पावर्स रेजोल्यूशन को आगे बढ़ाया है ताकि बिना मंजूरी के ईरान पर सैन्य कार्रवाई को रोका जा सके।
Frequently Asked Questions (FAQs)
नेशनल ईरानियन अमेरिकन काउंसिल (NIAC) की मुख्य मांग क्या है?
NIAC का कहना है कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई बढ़ाना गलत होगा। संगठन ने दोनों पक्षों से बातचीत के जरिए रास्ता निकालने और शांति बहाल करने की अपील की है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को क्या अल्टीमेटम दिया है?
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को समझौता करने के लिए केवल दो से तीन दिन का समय दिया है, ऐसा न होने पर फिर से हमले शुरू करने की चेतावनी दी गई है।
ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अभी क्या स्थिति है?
ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अपने देश में यूरेनियम संवर्धन की दर को कम करने पर विचार कर सकता है, लेकिन समृद्ध यूरेनियम को देश से बाहर भेजना उसकी रेड लाइन है।
