अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अपनी सख्ती बढ़ाते हुए नए प्रतिबंधों का ऐलान किया है। इन प्रतिबंधों का सीधा निशाना ईरान का तेल व्यापार और उन नेटवर्क को बनाया गया है जो गैरकानूनी तरीके से पैसों का लेन-देन कर रहे थे। इसके साथ ही अमेरिकी नौसेना ने ईरान के बंदरगाहों की पूरी तरह घेराबंदी कर दी है ताकि कोई जहाज वहां से निकल न सके।

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किन्हें निशाना बनाया गया और क्या है नया एक्शन?

अमेरिकी खजाने विभाग (OFAC) ने ईरान के तेल शिपिंग कारोबारी Mohammad Hossein Shamkhani और उनके नेटवर्क पर पाबंदी लगा दी है। इस कार्रवाई में कई व्यक्तियों, कंपनियों और जहाजों के नाम ब्लैकलिस्ट में डाले गए हैं। ये कंपनियां UAE, भारत, नीदरलैंड और मार्शल आइलैंड्स में रजिस्टर्ड थीं।

श्रेणी विवरण/संख्या
प्रतिबंधित व्यक्ति 3 व्यक्ति
प्रतिबंधित कंपनियां 17 एंटिटी
प्रतिबंधित जहाज 9 जहाज
प्रभावित देश UAE, भारत, नीदरलैंड, मार्शल आइलैंड्स

समुद्री नाकेबंदी और अमेरिका का क्या कहना है?

व्हाइट हाउस की प्रवक्ता Karoline Leavitt ने बताया कि ईरान के बंदरगाहों की नाकेबंदी पूरी तरह लागू हो चुकी है और इसे सख्ती से निभाया जा रहा है। अमेरिकी युद्धपोतों ने अब तक 6 जहाजों को ईरान से बाहर निकलने से रोका है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने संकेत दिया कि चीन ने ईरान को हथियार न भेजने पर सहमति जताई है और वे Strait of Hormuz को स्थायी रूप से खोलने की तैयारी में हैं।

आम लोगों और अर्थव्यवस्था पर क्या होगा असर?

IMF ने चेतावनी दी है कि इस तनाव से दुनिया भर में महंगाई बढ़ सकती है और ग्लोबल जीडीपी की ग्रोथ गिर सकती है। ईरान का दावा है कि युद्ध की वजह से उसे 270 अरब डॉलर का भारी नुकसान हुआ है। हालांकि, अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान में शांति वार्ता शुरू होने की भी खबरें आ रही हैं, जिससे तनाव कम होने की उम्मीद है।

Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.