सऊदी अरब और कतर समेत 8 देशों का बड़ा ऐलान, गाजा शांति समझौते में रुकावट के लिए इसराइल को ठहराया जिम्मेदार.

गाजा और फिलिस्तीन के इलाकों में शांति प्रयासों को रोकने के मामले में अरब और इस्लामिक देशों ने सीधा इसराइल पर निशाना साधा है। 16 अगस्त 2026 को सऊदी अरब, मिस्र, जॉर्डन, पाकिस्तान, इंडोनेशिया, तुर्की, कतर और संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE के विदेश मंत्रियों ने मिलकर एक संयुक्त बयान जारी किया। मंत्रियों ने साफ तौर पर कहा कि इसराइल लगातार शांति की कोशिशों में बाधा डाल रहा है और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2803 के तहत आने वाले शांति रोडमैप को मानने से पूरी तरह इंकार कर रहा है।
शांति योजना और फिलिस्तीन का समर्थन
विदेश मंत्रियों ने अपने बयान में इस बात पर जोर दिया कि इस शांति योजना को फिलिस्तीनी गुटों और हमास की तरफ से पहले ही स्वीकार किया जा चुका है। यह रोडमैप अमेरिका, मिस्र, कतर और तुर्की की लंबी बातचीत और कोशिशों का नतीजा है। मंत्रियों ने चेतावनी दी कि इसराइल की मनमानी और 15 सूत्रीय योजना को न मानना एक स्थायी समाधान की उम्मीदों को खत्म कर रहा है। वे चाहते हैं कि साल 1967 की सीमाओं के आधार पर और पूर्वी यरुशलम को राजधानी बनाकर एक स्वतंत्र फिलिस्तीनी देश बने, जिसे इसराइल स्वीकार नहीं कर रहा है.
कूटनीतिक तनाव और बैठकों का दौर
जैसे-जैसे कूटनीतिक तनाव बढ़ता जा रहा है, फिलिस्तीनी विदेश मंत्रालय ने इसराइली नीतियों और बस्तियों में हो रही हिंसा के खिलाफ दुनिया भर में दबाव बनाने के लिए अपनी कोशिशें तेज कर दी हैं। वहीं दूसरी तरफ, काहिरा में मिस्र के खुफिया अधिकारियों और अमेरिकी दूतों ने फिलिस्तीनी प्रतिनिधियों के साथ जरूरी बैठकें की हैं। इस पूरी खबर की विस्तृत जानकारी आप कतर विदेश मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट पर देख सकते हैं। इन बैठਕों का मुख्य मकसद सीजफायर समझौते को बचाना और अमेरिका के समर्थन वाले शांति ढांचे को बनाए रखना है ताकि इलाके में शांति लौट सके।