Arab League और Turkiye ने गाजा में तुरंत युद्धविराम और राहत सामग्री भेजने की की मांग, इसराइल के रवैये पर जताई चिंता।

Aanya13 August 20262 min read71 viewsWorld
Arab League और Turkiye ने गाजा में तुरंत युद्धविराम और राहत सामग्री भेजने की की मांग, इसराइल के रवैये पर जताई चिंता।

गाजा संघर्ष को लेकर अरब देशों और तुर्की के बीच लगातार चिंता बढ़ रही है और इसी सिलसिले में 13 अगस्त 2026 को मिस्र के एल अलामैन शहर में एक अहम बैठक हुई। इस बैठक में अरब लीग के महासचिव नबील फहमी और तुर्की के विदेश मंत्री हाकन फिडान ने हिस्सा लिया, जहां दोनों नेताओं ने मुस्लिम-अरब देशों के बीच आपसी तालमेल को मजबूत करने पर जोर दिया। इस उच्चस्तरीय बैठक का मुख्य उद्देश्य गाजा में चल रही हिंसा को रोकना और वहां के आम लोगों तक लगातार मानवीय सहायता पहुंचाना था। नेताओं ने इस बात पर भी जोर दिया कि इस्रायली सेना को गाजा पट्टी से पूरी तरह से पीछे हटना चाहिए ताकि क्षेत्र में शांति बहाली की दिशा में कोई ठोस कदम उठाया जा सके।

फिलिस्तीनी क्षेत्रों में बढ़ते तनाव पर गहरी चिंता

बैठक के दौरान अरब लीग के महासचिव नबील फहमी ने फिलिस्तीनी क्षेत्रों और लेबनान में हाल ही में बढ़े तनाव पर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने चेतावनी दी कि इस्रायली सैन्य कार्रवाई और बस्तियों में रहने वाले लोगों की हिंसा से पूरे क्षेत्र की स्थिति बिगड़ सकती है और एक स्वतंत्र फिलिस्तीन राष्ट्र बनने के रास्ते में बड़ी रुकावट पैदा हो रही है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वे इस मामले में दखल दें, खासतौर पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को आगे आकर स्थिति को संभालना चाहिए। तुर्की के विदेश मंत्री हाकन फिडान ने भी साफ शब्दों में कहा कि यदि मौजूदा शांति योजना पर कोई प्रगति नहीं होती है, तो तुर्की, मिस्र और कतर को इस गतिरोध को खत्म करने के लिए कुछ कड़े और बड़े कूटनीतिक कदम उठाने पर मजबूर होना पड़ सकता है।

शांति प्रस्ताव और अंतरराष्ट्रीय दबाव

यह महत्वपूर्ण बैठक ऐसे समय में हुई है जब इस्राइल ने हाल ही में 30 जुलाई 2026 को पेश किए गए 15 सूत्रीय शांति रोडमैप को मानने से इनकार कर दिया था। इस शांति प्रस्ताव में धीरे-धीरे हथियार डालने और सैनिकों को वापस बुलाने का पूरा खाका तैयार किया गया था। फिलिस्तीन की तरफ से इस योजना को स्वीकार कर लिया गया था, लेकिन हथियारों को छोड़ने के तौर-तरीकों को लेकर चल रहे विवाद और लगातार जारी हमलों के कारण दुनियाभर में इसकी कड़ी आलोचना हो रही है। कई बड़े नेताओं और 'Artists4Ceasefire' जैसे अधिकार समूहों ने इस मानवीय संकट को तुरंत और हमेशा के लिए खत्म करने की मांग की है ताकि आम लोगों की जान बचाई जा सके।

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