अरब देशों के विदेश मंत्रियों ने अम्मान में एक बड़ी बैठक की। इस बैठक का मुख्य मकसद अमेरिका और ईरान के बीच एक ऐसा समझौता करवाना है जिससे पूरे इलाके में शांति बनी रहे और सुरक्षा बढ़े। सऊदी अरब और बहरीन समेत कई देशों ने इस बात पर जोर दिया कि क्षेत्रीय तनाव को कम करना अब बहुत जरूरी हो गया है।
यह बैठक 22 जून 2026 को हुई, जिसकी अध्यक्षता बहरीन के विदेश मंत्री Dr. Abdullatif Alzayani ने की। इस मौके पर सऊदी अरब के प्रिंस Faisal bin Farhan और अन्य बड़े अधिकारी भी मौजूद थे। सभी मंत्रियों ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच एक व्यापक समझौता होने से आने वाले समय में क्षेत्र में स्थिरता आएगी।
सीजफायर का स्वागत और देशों का रुख
बता दें कि 15 जून 2026 को अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य अभियानों को रोकने के लिए एक शुरुआती सीजफायर समझौता हुआ था। इस कदम का सऊदी अरब, कुवैत, मिस्र, जॉर्डन और कतर जैसे देशों ने स्वागत किया। अरब लीग के महासचिव Ahmed Aboul Gheit ने इसे शांति की दिशा में एक बड़ा कदम बताया और कहा कि इससे होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में समुद्री सुरक्षा बेहतर होगी।
वहीं, UAE के विदेश मंत्रालय ने साफ किया कि बातचीत और कूटनीति ही सही रास्ता है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानूनों के पालन और दूसरे देशों की संप्रभुता का सम्मान करने की बात कही। जॉर्डन के विदेश मंत्री Ayman Safadi ने भी ईरान के साथ संबंधों को सुधारने का समर्थन किया, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि अरब देशों के आंतरिक मामलों में दखल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
ईरान की शर्त और नई नियुक्ति
दूसरी तरफ, ईरान का कहना है कि किसी भी स्थायी शांति के लिए फिलिस्तीन के मुद्दे को सुलझाना और लेबनान में स्थिरता लाना जरूरी है।
इस बैठक में एक और बड़ा फैसला लिया गया। अरब लीग ने Nabil Fahmy को नया महासचिव नियुक्त करने की मंजूरी दे दी है। Nabil Fahmy मिस्र के पूर्व विदेश मंत्री रह चुके हैं और वे 1 जुलाई 2026 से अपना कार्यकाल शुरू करेंगे। उनका लक्ष्य अरब देशों के बीच सहयोग बढ़ाना और क्षेत्रीय समस्याओं पर ज्यादा सक्रिय तरीके से काम करना होगा।
बैठक में सऊदी अरब की ओर से प्रिंस Mansour bin Khalid और Abdulaziz Al-Matar भी शामिल हुए, जबकि मोरक्को का प्रतिनिधित्व विदेश मंत्री Nasser Bourita ने किया।
