यरूशलम के लिए अरब और मुस्लिम देशों का बड़ा कदम, इसराइली गतिविधियों पर नज़र रखने के लिए बनेगा नया मीडिया प्लेटफॉर्म

अम्मान में बुधवार, 5 अगस्त 2026 को एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई, जिसमें अरब और मुस्लिम देशों के विदेश मंत्रियों ने यरूशलम में हो रहे इसराइली उल्लंघनों को बेनकाब करने के लिए एक स्थाई तंत्र बनाने का फैसला लिया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य एक समर्पित मीडिया प्लेटफॉर्म तैयार करना है, जो यरूशलम के इस्लामी और ईसाई पवित्र स्थलों के बारे में अंतरराष्ट्रीय समुदाय और दुनिया भर के लोगों को सही जानकारी पहुंचा सके। यह कदम इस क्षेत्र में बढ़ते तनाव और पवित्र स्थलों को हो रहे नुकसान के मद्देनजर उठाया गया है।
संयुक्त घोषणा पत्र और इसराइली नीतियों पर रुख
बैठक के बाद एक साझा घोषणा पत्र जारी किया गया, जिसमें उन सभी इसराइली नीतियों और उपायों की कड़ी निंदा की गई है जो यरूशलम की अरबी, इस्लामी और ईसाई पहचान को बदलने की कोशिश करते हैं। मंत्रियों ने स्पष्ट किया कि यरूशलम की कानूनी और जनसांख्यिकीय स्थिति को बदलने वाली कोई भी कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है और उसे अमान्य माना जाएगा। घोषणा पत्र में यह दोहराया गया कि पूर्वी यरूशलम फिलिस्तीनी क्षेत्र का एक अभिन्न हिस्सा है और यह फिलिस्तीन राज्य की राजधानी है। दुनिया भर के देशों से यह मांग की गई है कि वे यरूशलम में इसराइली प्रथाओं को रोकने के लिए तुरंत कदम उठाएं।
बैठक में शामिल प्रमुख नेता और उनकी चिंताएं
इस उच्च स्तरीय बैठक की मेजबानी जॉर्डन ने की थी, जिसमें यरूशलम पर अरब मंत्रिस्तरीय समिति के सदस्यों के अलावा तुर्की, पाकिस्तान, इंडोनेशिया और मलेशिया के विदेश मंत्री और अरब लीग के महासचिव ने भाग लिया। जॉर्डन के विदेश मंत्री Ayman Safadi ने चेतावनी देते हुए कहा कि यरूशलम गंभीर खतरे का सामना कर रहा है और वहां के पवित्र स्थलों पर इसराइली नीतियों के कारण अभूतपूर्व संकट मंडरा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसराइल पूर्वी यरूशलम पर अपना नियंत्रण सख्त कर रहा है और लोगों के पूजा करने की स्वतंत्रता को सीमित कर रहा है।
सऊदी अरब के विदेश मंत्री Prince Faisal bin Farhan ने भी इस मुद्दे की गंभीरता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि यरूशलम की सुरक्षा करना किसी भी न्यायपूर्ण शांति की स्थापना के लिए एक बुनियादी स्तंभ की तरह है। बैठक में शामिल सभी नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि वे यरूशलम की ऐतिहासिक स्थिति को किसी भी तरह से बिगड़ने नहीं देंगे। यह नई मीडिया पहल आने वाले समय में यरूशलम से जुड़ी खबरों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से उठाने में मदद करेगी, जिससे वैश्विक जनमत को सच्चाई का पता चल सकेगा।