अल्प-अक्सा मस्जिद और हरम अल-शरीफ परिसर में हाल ही में हुई इसराइली कार्रवाई ने दुनिया भर में हलचल मचा दी है। इसराइल के नेशनल सिक्योरिटी मिनिस्टर Itamar Ben-Gvir की अगुवाई में हजारों चरमपंथियों और सेटलर्स के घुसने के बाद सऊदी अरब, यूएई, कतर, जॉर्डन, तुर्की, मिस्र, इंडोनेशिया और पाकिस्तान ने इस घटना की कड़ी निंदा की है। यह घटना 23 जुलाई 2026 को हुई, जब ये लोग एक यहूदी शोक दिवस पर परिसर के अंदर पहुंच गए।
क्या था मामला और क्या है नियम
इस्लामिक वक्फ विभाग के अनुसार, उस दिन सुबह 3,228 इसराइली नागरिक परिसर में घुसे थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन लोगों ने वहां प्रार्थना की, इसराइली झंडे लहराए और इसराइली राष्ट्रगान गाया। सऊदी अरब और अन्य सहयोगी देशों ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों का खुला उल्लंघन बताया है। उनका कहना है कि यह ऐतिहासिक और कानूनी स्थिति (स्टैटस क्वो) को बदलने की एक सोची-समझी कोशिश है।
धार्मिक तनाव बढ़ने की चेतावनी
यरूशलम गर्वनरेट ने इस घटना को एक बड़ा और खतरनाक कदम बताया है, जबकि फिलिस्तीनी मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि इस तरह की उकसावे वाली कार्रवाई पूरे क्षेत्र में एक धार्मिक युद्ध भड़का सकती है। बता दें कि दशकों पुराने नियम के अनुसार, 144-ड्यूनम के इस पूरे परिसर को केवल मुसलमानों के इबादत की जगह माना जाता है और यहां गैर-मुस्लिमों की प्रार्थना पर रोक है। इस जगह के प्रशासन की जिम्मेदारी जॉर्डन के पास है और अरब देशों का कहना है कि यरूशलम के पवित्र स्थलों पर इसराइल का कोई अधिकार नहीं है।
