कोलंबिया ने सीरिया के गोलान हाइट्स पर इस्राइली कब्जे को दी मान्यता, अरब संसद ने किया कड़ा विरोध और बताया कानून के खिलाफ.

अरब संसद के वक्ता ने कोलंबिया के उस फैसले की कड़ी निंदा की है जिसमें सीरिया के गोलेन हाइट्स पर इस्राइली संप्रभुता को मान्यता दी गई है। यह बड़ा ऐलान 12 अगस्त 2026 को सामने आया, जिसे अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन बताया जा रहा है। कोलंबिया सरकार ने हाल ही में शपथ लेने वाले राष्ट्रपति अबेलाडो डी ला एस्प्रिएला के नेतृत्व में 10 अगस्त 2026 को इस फैसले की आधिकारिक घोषणा की थी। इस कदम के साथ कोलंबिया, अमेरिका के बाद दुनिया का केवल दूसरा ऐसा देश बन गया है जिसने इस तरह की मान्यता दी है।
अंतरराष्ट्रीय नियमों और संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों का उल्लंघन
कोलंबिया का यह नया कदम दुनिया भर के लंबे समय से चले आ रहे समझौतों और आम सहमति के बिल्कुल खिलाफ जाता है। अमेरिका और अब कोलंबिया को छोड़कर, पूरी दुनिया गोलन हाइट्स को सीरियाई भूभाग मानती है जिस पर इस्राइल ने सैन्य कब्जे के तहत अधिकार किया हुआ है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव संख्या 497 (1981) में इस्राइल द्वारा गोलन हाइट्स पर अपने कानून और प्रशासन को लागू करने के फैसले को पूरी तरह से खारिज किया गया था और उसे अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत शून्य घोषित किया गया था। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव ने भी जुलाई 2026 में फिर से इस बात की पुष्टि की थी कि गोलन हाइट्स सीरिया का अधिकृत क्षेत्र ही है।
खाड़ी देशों और अरब लीग की कड़ी प्रतिक्रिया
संयुक्त राष्ट्र के रुख का समर्थन करते हुए कई अरब देशों और तुर्की ने इस फैसले के खिलाफ अपनी कड़ी नाराजगी जताई है। कुवैत, ओमान, सऊदी अरब, सीरिया और अरब लीग जैसे प्रमुख संगठनों ने साफ शब्दों में कहा है कि गोलन हाइट्स हमेशा से सीरियाई अरब का कब्जा वाला क्षेत्र रहा है और रहेगा। इन देशों के नेताओं ने जोर देकर कहा कि किसी भी क्षेत्र पर जबरन कब्जे से उसकी संप्रभुता नहीं मिलती है। कोलंबिया का यह फैसला साफ तौर पर अंतरराष्ट्रीय कानूनों और वैध समझौतों को तोड़ने वाला है।
इस्राइल की प्रतिक्रिया और कोलंबिया का तर्क
दूसरी तरफ, इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कोलंबिया के इस फैसले पर आभार व्यक्त किया है। वहीं दूसरी ओर, कोलंबियाई अधिकारियों ने अपने इस फैसले के पीछे का कारण बताते हुए कहा कि मौजूदा क्षेत्रीय अस्थिरता के बीच इस्राइल की राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा के लिए गोलन हाइट्स का सामरिक महत्व बहुत ज्यादा है, जिसके चलते यह कदम उठाया गया है।