Cairo, Egypt में अरब पार्लियामेंट और अरब काउंसिलों के अध्यक्षों की आठवीं कॉन्फ्रेंस पूरी हुई. इस बैठक में सभी सदस्य देशों ने अपनी सुरक्षा और संप्रभुता को बचाने के लिए एक सुर में बोलने का फैसला किया. 27 जून 2026 को खत्म हुई इस मीटिंग में क्षेत्रीय खतरों से निपटने के लिए एकजुट होने और आपसी तालमेल बढ़ाने पर जोर दिया गया.

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सुरक्षा और एकता पर जोर

अरब पार्लियामेंट के स्पीकर Mohammed Al-Yamahi ने कहा कि आज के दौर में अरब देशों के लिए एकजुट होना बहुत जरूरी है. उन्होंने बताया कि यह कॉन्फ्रेंस ऐसे समय में हुई है जब पूरे क्षेत्र में चुनौतियां बढ़ गई हैं, इसलिए सभी देशों को अपनी आवाज एक करनी होगी.

मिस्र के विदेश मंत्री Badr Abdelatty ने भी इस बात का समर्थन किया. उन्होंने कहा कि संसदीय डिप्लोमेसी को और मजबूत करना होगा ताकि पूरे क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और सतत विकास लाया जा सके.

डिजिटल सुरक्षा की नई जंग

मीटिंग में ‘Arab Digital Sovereignty’ यानी डिजिटल संप्रभुता पर खास चर्चा हुई. हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के स्पीकर Hisham Badawi ने इसे एक रणनीतिक जरूरत बताया. उन्होंने कहा कि डेटा की सुरक्षा और साइबर सिक्योरिटी के लिए अब सख्त कानून बनाने की जरूरत है ताकि बाहरी देशों पर निर्भरता कम हो और राष्ट्रीय हितों की रक्षा हो सके. उन्होंने इसे एक निर्णायक लड़ाई बताया क्योंकि आज के समय में डेटा ही राष्ट्रीय शक्ति का मुख्य हिस्सा है.

ईरान और कुवैत मामला

अरब पार्लियामेंट ने कुवैत पर हुए ईरानी हमलों की कड़ी निंदा की. मीटिंग में साफ कहा गया कि कुवैत की सुरक्षा पूरे अरब जगत की सुरक्षा का हिस्सा है. किसी भी देश की संप्रभुता और स्थिरता के खिलाफ किसी भी हमले को स्वीकार नहीं किया जाएगा.

वहीं, अमेरिका और ईरान के बीच हुए शुरुआती समझौते का स्वागत किया गया. हालांकि, Al-Yamahi ने यह शर्त रखी कि कोई भी अंतिम समझौता तभी मान्य होगा जब उसमें अरब देशों, खासकर खाड़ी देशों के सुरक्षा हितों का ख्याल रखा जाए और दूसरे देशों के आंतरिक मामलों में दखल न दिया जाए.

कतर की भागीदारी और अन्य मुद्दे

कतर की शुरा काउंसिल ने भी इस कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लिया. उन्होंने बताया कि मीटिंग के एजेंडे में बाहरी हमलों से सुरक्षा, फिलिस्तीन के मौजूदा हालात और डिजिटल संप्रभुता जैसे बड़े मुद्दों पर एक साझा राय बनाना शामिल था.