Arab Parliament का बड़ा बयान, इजराइल के ‘कैदियों को फांसी’ देने वाले कानून का विरोध, अंतरराष्ट्रीय मदद की मांग
अरब संसद के स्पीकर Mohammed bin Ahmed Al Yamahi ने फिलिस्तीनी कैदियों को बचाने के लिए पूरी दुनिया से तुरंत मदद मांगी है। उन्होंने इजराइल द्वारा कैदियों को फांसी देने के लिए बनाए गए नए कानून को एक बड़ा अपराध बताया है। 17 अप्रैल को ‘फिलिस्तीनी कैदियों के दिवस’ के मौके पर उन्होंने इस कदम को अंतरराष्ट्रीय नियमों का खुला उल्लंघन कहा है।
इजराइल के नए कानून पर क्या है विवाद?
इजराइली संसद (Knesset) ने मार्च 2026 के आखिर में एक कानून पास किया जिसके तहत फिलिस्तीनी कैदियों को फांसी दी जा सकती है। अरब संसद के अध्यक्ष ने इसे एक खतरनाक कदम बताया है। उनका कहना है कि यह कानून जानबूझकर कैदियों को खत्म करने का एक तरीका है। उन्होंने इसे युद्ध अपराध और मानवता के खिलाफ जुर्म करार दिया है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय से क्या मांग की गई है?
स्पीकर Al Yamahi ने संयुक्त राष्ट्र (UN) और दुनिया के बड़े देशों से इस मामले में दखल देने को कहा है। उन्होंने मांग की है कि इजराइल की संसद की इंटर-पार्लियामेंट्री यूनियन की सदस्यता को निलंबित किया जाए। इसके साथ ही उन्होंने कैदियों की सुरक्षा के लिए एक स्वतंत्र जांच कमेटी बनाने की बात कही है। उन्होंने साफ कहा कि अगर दुनिया चुप रही तो इसे इस अपराध में साथ देना माना जाएगा।
कैदियों की मौजूदा स्थिति और आंकड़े
फिलिस्तीनी कैदियों की हालत काफी गंभीर है और कई संगठन इसके खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। Red Ribbon Campaign और BDS जैसे ग्रुप्स ने इस कानून के खिलाफ दुनिया भर में विरोध प्रदर्शन किए हैं। जेलों में बंद कैदियों के आंकड़े काफी चिंताजनक हैं।
| विवरण | संख्या/जानकारी |
|---|---|
| कुल फिलिस्तीनी कैदी | 9,600 से ज्यादा |
| कैदी बच्चे | लगभग 350 |
| महिला कैदी | 86 |
| प्रशासनिक हिरासत (बिना मुकदमे) | 3,500 से अधिक |
| अक्टूबर 2023 से अब तक मौतें | 88 |
| कुल मौतें (अब तक) | 325 |
| वापस नहीं मिले शरीर | 766 |